रांची। नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादास्पद नए इक्विटी नियमों पर रोक लगा दी, जिससे झारखंड के विश्वविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों में राहत और संतोष का माहौल बन गया है। रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित राज्य के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों ने इस फैसले का स्वागत किया।

13 जनवरी 2026 से लागू किए गए UGC के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम’ को लेकर देशभर में विरोध शुरू हो गया था। नियमों में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान थे, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए दिशा-निर्देश अस्पष्ट थे। इसी असमानता के कारण सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं और इनमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता का अभाव है। अदालत ने अंतरिम आदेश में इन नियमों पर रोक लगाते हुए 2012 में लागू नियम को फिलहाल प्रभावी रहने का निर्देश दिया। इस फैसले को छात्रों के अधिकार और शैक्षणिक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

झारखंड के विश्वविद्यालय परिसरों में नए नियमों को लेकर तनाव का माहौल था। छात्रों ने कहा कि अस्पष्ट नियमों के कारण शिक्षा का वातावरण प्रभावित हो सकता था। DSPMU के छात्र संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्यायसंगत बताया और सभी वर्गों के लिए समान सुरक्षा और भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिक्षकों का भी मानना है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और शोध का वातावरण बनाए रखना सर्वोपरि है। झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने कहा कि अस्पष्ट नियमों से गलतफहमी और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि नीतियां बनाते समय जमीनी हकीकत और सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है।

छात्रों और शिक्षकों ने केंद्र सरकार और UGC से अपील की है कि भविष्य में ऐसे नियम तैयार किए जाएं, जो स्पष्ट, संतुलित और सभी वर्गों के लिए समान हों, ताकि उच्च शिक्षा का उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के पूरा हो सके।

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