आज खबर विशेष में हम बात कर रहे हैं हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गये अभियान और शुरू हुई कार्रवाई पर। सरकार ने सीआइडी के एडीजी आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को निलंबित कर दिया है, जो अलग-अलग मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं। इसके पहले पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख रास बिहारी को निलंबित किया गया था, जिन पर अनियमितता के गंभीर आरोप थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव और कई विभागों के सचिव के पद पर आसीन सुनील वर्णवाल को हटाकर हेमंत सोरेन ने अपने सख्त रुख का संदेश दे दिया था। अलग-अलग मामलों और विभागों के भ्रष्टाचार की फाइल पर सरकार की निगाह है। कई बड़े मामलों में जांच की तैयारी हो चुकी है। जांच की आंच कहां तक जायेगी, इसका विश्लेषण करती आजाद सिपाही ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर झारखंड कैडर के आइपीएस अनुराग गुप्ता को निलंबित किये जाने की कार्रवाई के बाद सत्ता से लेकर हायर ब्यूरोक्रेसी तक के गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है। अनुराग गुप्ता के खिलाफ भाजपा के कैडर की तरह काम करने का आरोप लगा था और यह मामला चुनाव आयोग तक गया था। चुनाव आयोग के आदेश के आलोक में ही उनके खिलाफ रांची के हटिया थाने में मामला दर्ज हुआ था। अब उन्हें निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी है। वह 1990 बैच के आइपीएस हैं। मूल रूप से चंडीगढ़ के रहनेवाले हैं। एसपीजी में भी रह चुके हैं। हजारीबाग, गढ़वा के एसपी, रांची के एसएसपी, बोकारो, रांची, चाईबासा के डीआइजी, सीआइडी के आइजी, प्रोन्नत होने पर विशेष शाखा और सीआइडी के एडीजी पद पर भी रहे हैं। उनके दामन पर सबसे गहरा दाग 2018 के राज्यसभा चुनाव के दौरान लगा था। पहले आरोप लगा कि वह भाजपा के पक्ष में विधायकों को मैनेज कर रहे थे। कुछ रोज बाद उनकी बातचीत की एक आॅडियो रिकॉर्डिंग वायरल हुई तो जमकर सियासी बवाल मचा। उस समय झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कांफ्रेंस कर वीडियो रिकार्डिंग को प्रेस के समक्ष रखा था। उन्होंने चुनाव आयोग में भी शिकायत की थी। उस शिकायत के आलोक में एक प्रतिमनिधिमंडल भी चुनाव आयोग से मिला था। इस रिकॉर्डिंग के अनुसार वे विधायक निर्मला देवी के पति योगेंद्र साव से फोन पर बात कर रहे थे और उन पर दबाव डाल रहे थे कि उनकी विधायक पत्नी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट करें। उस चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन विपक्षी उम्मीदवार थे, जो एक वोट से चुनाव हार गये थे। चुनाव आयोग ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की। भारी दबाव के बाद जगन्नाथपुर थाना में मामला दर्ज तो किया गया था, लेकिन रघुवर सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
पथ निर्माण के घोटालों की चल रही जांच
इसके पहले राज्य सरकार ने पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख रासबिहारी सिंह को निलंबित कर दिया था। उन पर सरकारी राशि के दुरुपयोग करने का आरोप था। सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू करायी है। हेमंत सोरेन की सरकार बनने के तुरंत बाद 30 दिसंबर, 2019 को योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें राज्य के पथ निर्माण विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा की गयी थी। इसमें पाया गया कि समान काम के लिए दोनों विभाग में अलग-अलग दर निर्धारित की गयी है। अनुसूचित दर में असमानता होने की वजह से वित्तीय अनियमितता के कारण राज्यकोष को क्षति हुई है और इसका आकलन विस्तृत जांच के बाद ही संभव है। राज्य सरकार ने इसके लिए समिति के अध्यक्ष रास बिहारी सिंह को लापरवाह माना है। इसके लिए रास बिहारी सिंह से स्पष्टीकरण भी पूछा गया था, लेकिन उनके द्वारा दिये गये तर्क को सही नहीं माना गया गया। इसके अलावा उन पर एक फर्जी कंपनी को 51.62 करोड़ रुपये का टेंडर देने के लिए भी जिम्मेदार बताया गया है। कहा गया कि सितंबर 2019 में कंपनी को 7.65 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिसमें चार करोड़ रुपये मोबलाइजेशन एडवांस दिया गया। इसका खुलासा तब हुआ, जब कंपनी को डिबार कर दिया गया। बहरहाल, इस मामले की जांच चल रही है। बताया जाता है कि सरकार पथ निर्माण विभाग में पूरे पांच साल के दौरान हुई गड़बड़ियों की फाइल एक-एक कर खुलवा रही है। ऐसा हुआ तो जांच की आंच सेवानिवृत्त हो चुकीं मुख्य सचिव राजबाला वर्मा तक भी जायेगी।
सुनील वर्णवाल हैं राडार पर
हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद जिस आइएएस अफसर को पद से हटाया- वे हैं सुनील वर्णवाल। उन्हें पिछले चार हफ्तों से सरकार ने वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखा है। वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव और कई विभागों के सचिव के तौर पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगे हैं। मोमेंटम झारखंड घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच की अनुमति सरकार से मांगी है। कंबल घोटाले में भी उन पर आरोप है कि जानबूझ कर उन्होंने जांच की फाइल को लटका दिया। कई और अफसरों को लाभ पहुंचाने का भी उन पर आरोप है। कंबल घोटाले और कई अन्य अनियमितताओं में जांच के दायरे में वह आयेंगे। बता दें कि रघुवर सरकार में सुनील वर्णवाल की तूती बोलती थी और वही काम होता था, जिसे वह चाहते थे। सुनील वर्णवाल पर अपने ससुर डॉ त्रिभुवन प्रसाद वर्णवाल को फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष पद पर पदस्थापित करने का आरोप था। अभी उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने डॉ त्रिभुवन को सेवा से तत्काल मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही गैर सरकारी सदस्यों की सदस्यता भी समाप्त करने का निर्देश दिया है।
नपेंगी पूजा सिंघल भी
इसी तरह कृषि विभाग की सचिव पूजा सिंघल के खिलाफ भी जांच शुरू कराये जाने के संकेत हैं। चतरा और खूंटी के उपायुक्त के पद पर काम करते हुए उन पर मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में गंभीर आरोप लगे थे। पहले भी उन पर लगे आरोपों की जांच हुई थी, जिसमें उन्हें क्लिन चिट दे दी गयी थी। बता दें कि सबसे चर्चित मामला पूजा सिंघल के खिलाफ तब सामने आया, जब वह खूंटी में उपायुक्त थीं। वहां सरकारी योजनाओं में भारी बंदरबांट की बात उजागर हुई थी। इंजीनियर और अन्य अधिकारी तो उसमें नप गये, लेकिन पूजा सिंघल पर जांच की आंच भी नहीं आया। उन्हें पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा का काफी करीबी माना जाता था।
अब नये सिरे से उन पर जांच हो सकती है। उनके पति अभिषेक झा ने बरियातू रोड में पल्स हॉस्पिटल बनवाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बिल्डिंग की जांच का आदेश दिया है। आरोप है कि हॉस्पिटल की विशाल बिल्डिंग आदिवासी-भुईंहरी जमीन पर नाजायज तरीके से बनवायी गयी है।