भाकपा माओवादी के 25 लाख के इनामी और स्पेशल एरिया कमेटी (सैक मेंबर) विमल यादव उर्फ राधेश्याम यादव उर्फ उमेश यादव ने शुक्रवार को झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया। इसके खिलाफ 25 मामले दर्ज झारखंड और बिहार में दर्ज थे।

शुक्रवार को रांची जोनल आईजी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विमल यादव ने आईजी अभियान एवी होमकर, रांची जोनल आईजी पंकज कंबोज, डीआईजी एसटीएफ अनूप बिरथरे, रांची एसएसपी सुरेंद्र झा, ग्रामीण एसपी नौशाद आलम और सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया।

मौके पर झारखंड पुलिस के प्रवक्ता सह आईजी अभियान एवी होमकर ने कहा कि झारखंड सरकार ने राज्य को नक्सल मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सभी नक्सली-उग्रवादी संगठन के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई की जा रही है। इसमें सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर, कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस के जवान लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे है।

होमकर ने कहा कि राज्य को पूरी तरह से नक्सल मुक्त करने और भटके हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए झारखंड सरकार की आत्मसर्पण नीति नई दिशा के तहत कार्य किया जा रहा है। इसका परिणाम काफी सकारात्मक रहा है। अब तक भाकपा माओवादी सहित अन्य उग्रवादी संगठन के कई बड़े नक्सली-उग्रवादी सरेंडर कर रहे है। उन्होंने बताया कि पुलिस के लगातार अभियान, बढ़ती दबिश संगठन के आंतरिक शोषण से नाराज होकर सरकार की सरेंडर एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर विमल यादव ने सरेंडर किया है।

उन्होंने बताया कि 1995-96 में मजदूर किसान संग्राम समिति में विमल शामिल हुआ। इसके बाद मजदूर किसानी संग्रामी परिषद का सक्रिय सदस्य रहा। 1999 में एक करोड़ के इनामी निशांत जी उर्फ अरविंद जी से मिलने के बाद भाकपा माओवादी के सक्रिय सदस्य के रूप में कुरियर बॉय का काम करने लगा। नक्सल संगठन से जुड़े विमल यादव ने कुरियर बॉय के रूप में काम की शुरुआत की थी। वहां से वह आज के समय में 25 लाख का इनामी नक्सली बन गया।

मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के करौना थाना के सलेमपुर का रहनेवाला विमल यादव अरविंद की मौत के बाद नेतृत्व संभाल रहा था। माओवादियों के लिए सबसे सेफ जोन माने जानेवाले बूढ़ा पहाड़ के इलाके में विमल का बड़ा कद माना जाता था। वर्ष 2005 में सब जोनल कमांडर बना, 2009 में जोनल कमांडर बना, 2011 में रीजनल सदस्य बना, 2012 में एसएसी सदस्य बना, दिसम्बर 2018 में प्लाटून ईआरबी बना, 2019 में सुधाकरण की मौत के बाद प्लाटून का चार्ज लिया। संगठन में रहते हुए विमल ने 14 बड़े घटनाओं को अंजाम दिया था।

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