रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में अंतरिम आदेश पारित करते हुए Pharm.D (डॉक्टर ऑफ फार्मेसी) डिग्रीधारी अभ्यर्थी मन्नू कुमार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता का आवेदन ऑफलाइन मोड में स्वीकार किया जाए, हालांकि परिणाम अदालत की अनुमति के बिना घोषित नहीं होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आन्या ने पैरवी करते हुए बताया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा जारी विज्ञापन में केवल “डिग्री इन फार्मेसी” लिखा गया था, जिसमें यह स्पष्ट नहीं था कि यह स्नातक, डिप्लोमा या परास्नातक होनी चाहिए। इसके बावजूद आयोग ने Pharm.D डिग्री को फार्मेसी डिग्री मानने से इनकार कर दिया था।
कोर्ट ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के नियम 49 का हवाला देते हुए कहा कि फार्मेसी या फार्मास्युटिकल साइंस में डिग्री रखने वाला व्यक्ति इस पद के लिए योग्य है। याचिकाकर्ता ने भारत सरकार की 16 जुलाई 2019 की अधिसूचना भी पेश की, जिसमें Pharm.D को उच्चतर योग्यता माना गया है और ऐसे अभ्यर्थी D.Pharm, B.Pharm या M.Pharm वाले पदों के लिए पात्र हैं।
अदालत ने प्रथम दृष्टया Pharm.D डिग्रीधारक अभ्यर्थी को योग्य मानते हुए JPSC के रुख को खारिज कर दिया। यह फैसला फार्मेसी के छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो विभिन्न सरकारी भर्तियों में अपनी योग्यता को लेकर असमंजस में थे।
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