हजारीबाग, झारखंड: नगर निगम चुनाव के बीच जनता की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां करोड़ों रुपये की खरीदी गई निगम गाड़ियां पिछले दो-तीन सालों से कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। सफाई, जलापूर्ति और अन्य नगर सेवाओं के लिए खरीदे गए ये वाहन आज भी निगम परिसर में जस के तस खड़े हैं, जबकि इनके ड्राइवर और मैकेनिक नियमित वेतन ले रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि डीजल और सर्विसिंग के नाम पर भी खर्च दिखाए जाने की चर्चा है, मगर जमीनी हकीकत में ये गाड़ियां सड़क पर नहीं उतर पाई हैं। नगर निगम प्रशासन की इस लापरवाही से जनता के करोड़ों रुपये डूब रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी टूटी नहीं है।
चुनावी माहौल में जहां मेयर पद के उम्मीदवार और वार्ड प्रत्याशी विकास के बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, वहीं करोड़ों की इन बेकार पड़ी गाड़ियों का मुद्दा किसी के मेनिफेस्टो में जगह नहीं पा सका है। न तो कोई प्रत्याशी इस पर खुलकर बोल रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस मामले पर कोई बयान दिया है।
सवाल उठता है कि क्या जनता के पैसे की बर्बादी पर सबकी चुप्पी बनी रहेगी? मतदाताओं को चाहिए कि जब भी प्रत्याशी वोट मांगने आएं, उनसे इस मुद्दे पर साफ जवाब जरूर मांगें कि जीत के बाद इन गाड़ियों का क्या होगा और जिम्मेदारी कौन तय करेगा। निगम प्रशासन को तुरंत इन वाहनों को सड़क पर उतारने की कार्रवाई करनी चाहिए।
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