एजेंसी
न्यूयार्क। भारत की आतंकवाद पर रोक लगाने की कोशिशों पर चीन ने वीटो का इस्तेमाल करके अड़ंगा डाला है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था। इस पर चीन ने वीटो लगाते हुए इसे टेक्निकल होल्ड पर डाल दिया। इससे ये तीन देश बेहद नाराज हैं। रूस ने भी इस पर गहरी आपत्ति जतायी है। इन चार देशों ने कहा है कि वे इस मामले पर वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहे हैं।
इधर चीन के इस कदम पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अब इस मामले पर चीन का बयान आया है। उसका कहना है कि मसूद अजहर पर प्रतिबंध से पहले जांच के लिए समय चाहिए, ताकि सभी पक्ष ज्यादा बातचीत कर सकें और एक अंतिम निर्णय पर पहुंचें, जो सभी को स्वीकार्य हो। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत अजहर को नामित करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा 27 फरवरी को पेश किया था। यह प्रस्ताव इसलिए पेश किया गया था, क्योंकि 14 फरवरी को जैश के आत्मघाती हमलावर ने सीएरपीएफ के एक काफिले पर आतंकी हमला किया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गये थे। इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव आ गया था। अलकायदा प्रतिबंध समिति के सदस्यों को इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसकी समय सीमा खत्म होने से पहले चीन ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए टेक्निकल होल्ड पर डाल दिया कि उसे इसकी जांच करने के लिए और समय चाहिए।
पिछले 10 साल में चौथी बार चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के रास्ते में रोड़े अटकाये हैं। जब इस बारे में पूछा गया, तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि चीन का फैसला समिति के नियमों के अनुसार है। उन्होंने कहा कि पूरी उम्मीद है कि समिति द्वारा की गयी कार्रवाई प्रासंगिक देशों को बातचीत और परामर्श में शामिल करने और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में अधिक जटिल कारकों को जोड़ने से रोकने में मदद करेगी। लू ने कहा कि 1267 समिति में तकनीकी पकड़ के अनुसार हमारी कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए है कि समिति के पास इस मामले का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय होगा, ताकि संबंधित पक्षों के पास भी वार्ता और परामर्श के लिए समय हो। सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान ही इस समस्या का स्थायी समाधान होगा। चीन इस मुद्दे को ठीक से संभालने के लिए भारत सहित सभी पक्षों से संवाद और समन्वय के लिए तैयार है।
राहुल का वार : विफल मोदी सरकार की विफल विदेश नीति
नयी दिल्ली। मसूज अजहर के मुद्दे पर चीन के वीटो के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे विफल मोदी सरकार की विफल विदेश नीति करार दिया। उन्होंने ट्वीट किया है कि कमजोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से डरे हुए हैं और चीन के खिलाफ उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरेजवाल ने ट्वीट में लिखा है कि मोदी की चीन कूटनीति, गुजरात में शी के साथ झूला झूलना, दिल्ली में गले लगाना, चीन में घुटने टेक देना रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि 56 इंच वाली गले लगने की कूटनीति (हगप्लोमेसी) और झूला झुलाने के खेल के बाद भी चीन-पाकिस्तान का जोड़ भारत को लाल आंख दिखा रहा है।
भाजपा का पलटवार : मसूद अजहर पर चीन वीटो लगाता है, तो राहुल खुश होते हैं
नयी दिल्ली। मसूद अजहर के मुद्दे पर कांग्रेस के तंज पर भाजपा ने पलटवार किया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूछा है कि जब भारत को पीड़ा होती है, तो राहुल गांधी को खुशी क्यों होती है? इसके अलावा उन्होंने कहा कि राहुल के चीन के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि चौथी बार अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किये जाने की कोशिश की गयी थी। यह फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन का प्रस्ताव था। यह भारत की कूटनीतिक जीत है कि जिसके लिए पहले वह पहल करता था, अब अन्य देश उसका साथ दे रहे हैं।
जेटली का खुलासा : नेहरू के कारण ही चीन को स्थायी सीट मिली
नयी दिल्ली। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में चीन के अड़ंगे के बाद सियासत शुरू हो गयी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी को कमजोर पीएम कहा, तो जेटली ने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दोषी ठहराया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू मूल रूप से दोषी हैं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की बजाय चीन का पक्ष लिया था।
जेटली ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए दो अगस्त 1955 को नेहरू द्वारा मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा, कश्मीर और चीन, दोनों पर मूल गलती एक ही व्यक्ति द्वारा की गयी। आम चुनाव में बीजेपी की प्रचार समिति के प्रमुख जेटली ने अपने ट्वीट में इस पत्र के कुछ अंशों का उल्लेख भी किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि नेहरू द्वारा दो अगस्त 1955 को मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र से स्पष्ट होता है कि अनौपचारिक रूप से अमेरिका ने सुझाया था कि चीन को संयुक्त राष्ट्र में लिया जाये, लेकिन उसे सुरक्षा परिषद में नहीं लिया जाये तथा भारत को सुरक्षा परिषद में लिया जाये।
जेटली ने अपने ट्वीट में नेहरू के पत्र के हवाले से कहा कि इसे स्वीकार नहीं कर सकते और यह चीन जैसे महान देश के साथ उचित नहीं होगा कि वह सुरक्षा परिषद में नहीं हो। राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए जेटली ने पूछा कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष यह बतायेंगे कि मूल दोषी कौन था?