लातेहार। लातेहार प्रखंड में एक बार फिर सरकारी खरीद प्रणाली की खामियों का खामियाजा किसान को भुगतना पड़ रहा है। शीशी लैंपस की लापरवाही के कारण किसान संतोष कुमार का धान बेचने के बाद भी पूरा भुगतान अटक गया है। जानकारी के अनुसार, लैंपस ने किसान से धान की खरीद तो कर ली, लेकिन उसे निर्धारित राइस मिल तक नहीं पहुंचाया, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधर में लटक गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लैंपस के पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही बकाया राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस भी शुरू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जब तक लैंपस से पैसे की वसूली नहीं हो जाती, तब तक किसान को शेष भुगतान नहीं किया जा सकेगा।

बताया जा रहा है कि संतोष कुमार ने वर्ष 2025 में शीशी लैंपस के माध्यम से लगभग 56 हजार क्विंटल धान बेचा था। सरकारी नियमों के अनुसार, धान बेचते समय किसान को कुल राशि का 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत किया जाता है, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि तब दी जाती है, जब धान को राइस मिल या सरकारी गोदाम तक पहुंचा दिया जाता है।

इसी प्रक्रिया के तहत किसान को पहली किस्त के रूप में 65 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन दूसरी किस्त, जो कि 65 हजार रुपये ही है, अब तक नहीं मिल पाई है। इसका मुख्य कारण यह है कि लैंपस ने खरीदा गया धान मिल तक नहीं पहुंचाया, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी खरीद व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान का कहना है कि गलती लैंपस की है, लेकिन सजा उसे भुगतनी पड़ रही है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और वसूली के बाद ही किसान को बकाया राशि देने की बात कही जा रही है।

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