वाशिंगटन/टोक्यो। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देशों को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद नहीं की तो उनका भविष्य बहुत बुरा होगा। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जो देश इस रणनीतिक जलमार्ग से फायदा उठाते हैं, उन्हें उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देना होगा।
ट्रंप ने कहा, “अगर कोई जवाब नहीं आता तो नाटो के भविष्य के लिए यह बहुत बुरा होगा।” उन्होंने यूक्रेन को मिली अमेरिकी सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि अब यूरोपीय देशों को अमेरिकी मदद का बदला चुकाना होगा। राष्ट्रपति ने मांग की कि नाटो देश बारूदी सुरंग नष्ट करने वाले जहाज सहित हर जरूरी मदद उपलब्ध कराएं। एयर फोर्स वन से व्हाइट हाउस लौटते समय ट्रंप ने दोहराया, “हम हमेशा नाटो के साथ खड़े हैं, पर देखना होगा कौन हमारी इस छोटी सी मदद को टालता है।”
ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी निशाना साधा। उनकी नाराजगी का कारण यह रहा कि स्टार्मर ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों को तुरंत समर्थन नहीं दिया। ट्रंप ने कहा, “ब्रिटेन को हमारा सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है, लेकिन जब मदद मांगी तो वह साथ नहीं आए।”
वहीं जापान ने होर्मुज में सैन्य भेजने से साफ इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि उनकी कोई योजना नहीं है, हालांकि सरकार जरूरी कदमों पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि ताकाइची और ट्रंप गुरुवार को वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की एक-तिहाई तेल आपूर्ति का गेटवे है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इसकी सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता बन गई है। नाटो में 32 सदस्य देश हैं और स्वीडन नवीनतम सदस्य है। ट्रंप की चेतावनी से यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा है।

