रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि निजी स्कूलों के शिक्षकों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बेहतर वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, फिर भी सरकारी शिक्षा का स्तर नहीं सुधर रहा, यह चिंता का विषय है। सीएम ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में देश के प्रति प्रेम और गरीब बच्चों के प्रति संवेदना है, तो वे बच्चों को इमानदारी से शिक्षा दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए राज्य सरकार पूरी कोशिश कर रही है। बच्चों का ड्राप आॅउट कम हो, इसके लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। इसमें सफलता भी मिली है, लेकिन लाखों बच्चे अब भी स्कूलों से बाहर हैं। इन्हें स्कूल पहुंचाना हम सबकी जिम्मेवारी है। सीएम ने कहा कि संथाल की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। वहां के आदिवासी बहुल गांवों में जाने से काफी पीड़ा होती है। आजादी के 70 साल बाद भी वहां के गरीब अशिक्षित हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी से लड़ने का सबसे बेहतर औजार शिक्षा है। शिक्षा का दीप जलाने के लिए जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी आगे आयें। विद्यालय प्रबंधन समिति के लोग गांवों में चौपाल लगा कर लोगों को जागरूक करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे वोट बैंक नहीं हैं, इसलिए सरकारी शिक्षा का बुरा हाल है। मुख्यमंत्री खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय विद्यालय चलें चलायें अभियान-17 सह विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों के राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
शिक्षक बहाली में नहीं चले पैरवी और रिश्वत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहिए। शिक्षक ही बच्चों का भविष्य बनाते हैं, इसलिए हमें संस्कार देने वाले टीचर्स चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक बहाली में घूस और पैरवी नहीं चलनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो लोग 181 पर कॉल कर शिकायत करें, सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। सीएम ने कहा कि स्कूलों में फेक शिक्षकों के पढ़ाने की खबरें आयीं। इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने सभी स्कूलों में शिक्षकों का फोटो लगाने का निर्देश दिया। स्कूलों में बॉयोमीट्रिक सिस्टम भी लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें शैक्षणिक भ्रमण पर दूसरे राज्यों में भेजने का भी प्रबंध किया गया है। कहा कि गरीब एवं निम्न मध्यम वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए सरकार आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
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