जमशेदपुर : एक तरफ पूरा विश्व खतरनाक कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने को लेकर जद्दोजहद कर रहा है. भारत में इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने को लेकर 21 दिनों का लॉक डाउन है, लेकिन अभी भी लोग मामले की गंभीरता को समझने को तैयार नहीं. जहां बेवजह लोग अभी भी घरों से निकल रहे हैं. वैसे लॉक डाउन से आवश्यक सेवाओं को दूर रखा गया है, लेकिन इसका नाजायज फायदा लोग उठा रहे हैं. सफाईकर्मियों स्वास्थ्यकर्मियों, मीडियाकर्मियों के लिए राहत जरूर दी गई है, इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से पास निर्गत किए गए हैं, लेकिन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सरकार और प्रशासन के पैरलल अपनी व्यवस्था चला रहे हैं.
इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान सर्किट हाउस गोलचक्कर के पास एक एसी मिस्त्री को स्वास्थ्य मंत्री द्वारा निर्गत पास के साथ पकड़ा. वह एसी मिस्त्री को जब पुलिस ने रोका तो उसने पहले तो प्रेस का नाम लिया, लेकिन जब पास मांगा तो स्वास्थ्य मंत्री का पास दिखाया. उसके बाद उसकी पहचान पूछी गयी तो मालूम चला कि वह जिस नाम का पास लेकर चल रहा था, वह पास उसका था ही नहीं. जब पुलि ने उससे सख्ती बरती तब उसने बताया कि वह पास उसके दोस्त का है, जिसको स्वास्थ्य मंत्री के दफ्तर से पास दिया गया है. उस पास के जरिये वह काम कर रहा था.
इसके बाद पुलिस ने पास का असल मालिक को बुलाया. पास वाले और गलत व्यक्ति के नाम से पास लेकर घुमने वाले को उठकबैठक कराया और फिर उसकी खबर लेने के बाद छोड़ दिया. इस संबंध में पुलिस ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. वैसे अब यह तो स्वास्थ्य मंत्री ही बताएंगे कि उनकी मंशा क्या है, लेकिन इतना जरूर है कि उन्होंने अपने पद का प्रभाव दिखाते हुए सरकार और प्रशासन के समानांतर व्यवस्था जमशेदपुर में लागू कर दी है