कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में लगातार हो रहे विस्फोटों ने राज्य को दहला दिया है। हाल ही में दक्षिण 24 परगना के पाथरप्रतिमा में हुए विस्फोट ने लोगों को फिर से उन भयावह घटनाओं की याद दिला दी जो पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में घट चुकी हैं। बीते चार महीनों में यह तीसरी बार है जब इस तरह का हादसा हुआ है। इससे पहले डायमंड हार्बर और नदिया के कल्याणी में भी इसी तरह के विस्फोटों में कई लोगों की जान जा चुकी है।

बंगाल के प्रमुख विस्फोट और उनकी भयावहता

1. 16 मई 2023 – खादिकुल, पूर्व मेदिनीपुर (मृत : 12)

खादिकुल गांव में दोपहर के समय अचानक तेज विस्फोट हुआ जिससे पूरा इलाका दहल उठा। विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी फैक्ट्री जलकर राख हो गई और आसपास के कई घरों में आग लग गई। इस घटना में 12 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद ग्रामीणों ने इस अवैध धंधे को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया। प्रशासन ने भी क्षेत्र में नजरदारी बढ़ा दी।

2. 21 मई 2023 – बजबज, दक्षिण 24 परगना (मृत : दो)

खादिकुल हादसे के महज पांच दिन बाद बजबज के चिंगड़ीपोटा इलाके में एक घर में तेज विस्फोट हुआ। यह विस्फोट घर की दूसरी मंजिल पर हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद लोगों ने अपने इलाके में इस तरह की फैक्ट्रियां बंद करने की मांग उठाई। हालांकि, कुछ लाइसेंसी फैक्ट्रियां अभी भी संचालित हो रही हैं। प्रशासन ने भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

3. 28 दिसंबर 2024 – चंपाहाटी, दक्षिण 24 परगना (मृत : एक)

सर्दियों की दोपहर में अचानक एक घर में जोरदार धमाका हुआ जिससे मकान का एक हिस्सा गिर गया। इस विस्फोट में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से शंकारी सरदार नामक एक महिला की मौत हो गई। इस घटना के बाद से इलाके में अवैध पटाखा निर्माण पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

4. सात फरवरी 2025 – कल्याणी, नदिया (मृत : पांच)

शाम के समय रथतला इलाके में पटाखा फैक्ट्री में जबरदस्त विस्फोट हुआ, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद प्रशासन ने दोषी कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी।

राज्य में एक के बाद एक विस्फोट होने के बावजूद अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पाई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार सख्त चेतावनी दी है, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। पाथरप्रतिमा की घटना ने इस खतरे को और उजागर कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि वे अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं, लेकिन इस समस्या का पूरी तरह से समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।

इन घटनाओं ने आम जनता को दहशत में डाल दिया है। लोग अब अपने इलाकों में अवैध पटाखा निर्माण को पूरी तरह से बंद करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। हालांकि राज्य प्रशासन पर अवैध पटाखा फैक्ट्रियों से सांठगांठ कर वसूली के आरोप भी लगे हैं।

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