कोलंबो : ईस्टर के दिन श्री लंका में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद यहां के बहुसंख्यक बौद्धों में भी दहशत का माहौल है। कोलंबो का प्रसिद्ध गंगारमाया मंदिर लगभग खाली हो गया था। 21 अप्रैल को हुए धमाकों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे। बौद्धों में डर है कि जेहादी उनपर भी अटैक कर सकते हैं। ब्रिटेन से श्री लंका आए निलमन एकानायके ने बताया कि यहां चारों ओर अफवाहों को बाजार गर्म है इस वजह से मंदिर भी खाली पड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने एक पूजा के स्थान को टारगेट किया। बौद्धों का मंदिर भी पूजा का स्थान है। रात में जब 8 बजे के आसपास रोड पर निकलते हैं तो लगता है जैसे सुबह के चार बजे हों। कोई भी रात में निकलने से परहेज करता है और यह मैं पहली बार देख रहा हूं।’ मंदिर के एक भिक्षु पलेगमा रथानासारा ने भी अनिश्चितता जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘इंटेलिजेंस सर्विसेज का कहना है कि अगला अटैक बौद्ध मंदिर में होगा।’ राजनीतिक विशेषज्ञ कुसल परेरा ने कहा कि हाल में हुए हमले में मुख्य विक्टिम ईसाई थे और इससे बौद्ध राज चाहने वाले कट्टरपंथियों के भी हौसले बुलंद हुए हैं।

उन्होंने कहा कि साधारण बौद्धों को डर है कि हमला उनपर हो सकता है। ‘हम देखते हैं कि बौद्धों में डर का माहौल बनाया जा रहा है। आखिरी में समाज में सेना का दखल हो जाएगा।’ इस हमले के बाद श्री लंका की सरकार की भी जमकर आलोचना हो रही है। फायरब्रैंड बौद्धों ने भी सरकार को ही दोषी ठहराया है कि वे आतंकवादियों को रोक नहीं पाए। बौद्धों का कहना है कि उन्होंने इस्लामिक आतंकवाद के लिए सरकार का आगाह किया था लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

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