मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भाजपा विधायक दल के नेता ने दिये सुझाव
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में बड़े शहरों में काम कर अपनी जीविका चला रहे मजदूर पूरी तरह बेरोजगार हो गये हैं क्योंकि वहां काम-धंधा बंद हो गया है। कोरोना महामारी से भयभीत होकर ये अपने-अपने घरों को लौटेंगे। गृह मंत्रालय ने 30 अप्रैल को प्रवासी मजदूरों को अपने-अपने गृह राज्य में लाने की अनुमति दे दी है। ऐसे में पूरे प्रदेश में नौ लाख मजदूर लौटेंगे। इन मजदूरों के लिए रोजगार का सृजन करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी। रोजगार का सृजन नहीं होने पर इन्हें भूखे प्यासे रहने को विवश होना होगा। उत्तरी छोटानागपुर और पलामू प्रमंडल के लगभग छह लाख मजदूर अब अपने-अपने घरों को लौटनेवाले हैं। इन लोगों के पास इतनी जमीन भी नहीं है कि वे खेतों मेें काम करके अनाज पैदा करके जीविकोपार्जन कर सकें। ऐसे लोगों के लिए रोजगार सृजन करने के लिए सरकार को इन क्षेत्रों में लघु और मध्यम उद्योग धंधे शुरू कराने होंगे। नहीं तो बेरोजगारी का दंश झेलते हुए इन मजदूरों को भूखों रहने के लिए विवश होना होगा।

मजदूरों को कार्यकुशल बनाये सरकार
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वापस लौटे मजदूरों के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम विशेष रूप से संचालित कर उन्हें कार्यकुशल बनायें जिससे उद्योग-धंधों में ऐसे श्रमिक रोजगार प्राप्त कर सकें। इसके अलावा इन प्रक्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए लघु और मध्यम प्रकार के उद्योग धंधे लगाने की पहल सरकार को करनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार के उपक्रमों के साथ-साथ उद्यमियों को भी आमंत्रित कर इन क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उद्यमियों को विशेष रियायत दे सरकार
उन्होंने कहा कि इन प्रक्षेत्रों को विशेष औद्योगिक जोन घोषित कर यहां विशेष रियायतें देकर उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य के एक वरीय अधिकारी को नोडल आॅफिसर के रूप में तैनात कर उद्योग लगाने को इच्छुक उद्यमियों को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत हर संभव सहयोग करते हुए उनके रास्ते में आनेवाली अड़चनें निश्चित समय सीमा में दूर की जानी चाहिए जिससे राज्य में उद्योग-धंधे स्थापित हो सकें और वापस लौटे मजदूरों को अपने ही प्रदेश में काम करने का मौका मिल सके।

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