नई दिल्ली। लोगों को फिलहाल लोन की ईएमआई न चुकाने की सुविधा देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। याचिकाकर्ता वकील के वीडियो लिंक से न जुड़ने के चलते सुनवाई 11 जून तक के लिए टाल दी गई। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने कहा कि कोर्ट सीधे इस तरह का आदेश नहीं दे सकता, याचिकाकर्ता को केंद्र को ज्ञापन देना चाहिए।

वकील विशाल तिवारी ने दायर याचिका में कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर की वजह से बेरोजगारी बढ़ी है और लोगों की कमाई में काफी कमी आई है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ने लोगों की समस्याओं के समधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान रिजर्व बैंक ने 6 अगस्त, 2020 को एक सर्कुलर जारी कर लोन को रिस्ट्रक्चर करने का निर्देश दिया था। कोरोना की दूसरी लहर उससे भी खतरनाक है। ऐसी स्थिति में देश के आम नागरिकों को वैसी ही सुविधा देने की तत्काल आवश्यकता है।

याचिका में कहा गया है कि 6 मई को एमएसएमई सेक्टर के लिए लाई गई योजना वास्तविक जरूरतमंदों की मदद करने में नाकाम है। लोगों को सैलरी नहीं मिल रही है। व्यक्तिगत आमदनी घट गई है। ऐसी स्थिति में लोगों की समस्याओं से आंखें नहीं मूंदी जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में बैंकों और वित्तीय संस्थाएं लोगों से अगले छह माह तक ईएमआई वसूलने के लिए दबाव न डालें। इसके अलावा किसी खाते को एनपीए न घोषित किया जाए।

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