चिंता : पंजाब-हिमाचल में खालिस्तानी आतंकियों की खुंटचाल से पैदा हुआ संदेह
वीरता, वैभव और विकास के प्रतीक पंजाब तथा पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने पूरे देश को एक अजीब किस्म की चिंता में डाल दिया है। पहले पंजाब में खालिस्तान समर्थकों द्वारा की गयी हिंसा, उसके बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा की चहारदीवारी पर खालिस्तान समर्थक पोस्टर और झंडे, फिर हरियाणा में विस्फोटकों की बरामदगी और अब मोहाली में पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा के मुख्यालय पर रॉकेट से हमले की घटनाओं ने एक गंभीर सवाल पैदा किया है कि क्या ये घटनाएं भारत को आतंकवाद की भट्ठी में झोंकने की साजिश है। इन घटनाओं के बरअक्स एक खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस का यह खुलासा कि उसने पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के लिए विदेशों से 43 करोड़ रुपये का चंदा भेजा था, पंजाब में हाल में सत्तारूढ़ इस पार्टी को सवालों के घेरे में खड़ा करता है। वैसे भी पंजाब चुनाव से पहले कभी आप के शीर्ष नेता रहे चर्चित कवि डॉ कुमार विश्वास ने खालिस्तान को लेकर अरविंद केजरीवाल पर जो आरोप लगाये थे, वे भी एक के बाद एक सच साबित होते जा रहे हैं। ऐसे में इन आतंकी घटनाओं ने पूरे देश के सामने और खास कर पंजाब के सामने इस साजिश को बेनकाब करने की चुनौती पेश कर दी है। खालिस्तानी आतंकियों की इस साजिश और सिख फॉर जस्टिस के खुलासे से उत्पन्ना चुनौती का विश्लेषण करती आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह की खास रिपोर्ट।
देश के समृद्ध राज्यों की कतार में शुमार पंजाब इन दिनों अशांत तो नहीं, चिंतित जरूर है। जिस राज्य ने महज दो महीने पहले भारतीय राजनीति में सशक्त विकल्प के रूप में आम आदमी पार्टी को पांच साल के लिए अपनी रहनुमाई की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसकी असलियत सामने आते देख पंजाब के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गयी हैं। पिछले दो महीने में एक के बाद एक आतंकी घटनाओं ने केवल पंजाब को ही नहीं, बल्कि पूरे देश में यह आशंका पैदा कर दी है कि यह सब कहीं भारत को एक बार फिर आतंकवाद की भट्ठी में झोंकने की साजिश तो नहीं है। इस सवाल का जवाब जानने से पहले हाल के दिनों में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में खालिस्तान समर्थक आतंकी गिरोहों की कारस्तानी पर ध्यान देना होगा।
पंजाब-हिमाचल में आतंकी घटनाएं
पिछले महीने के अंत में पटियाला में खालिस्तान समर्थकों ने शिवसेना के एक जुलूस पर हमला कर दिया। यह हमला उस वक्त हुआ, जब शिवसेना खालिस्तान विरोधी मार्च निकाल रहे थे। इसमें कई लोग घायल हो गये। पंजाब पुलिस पूरे हमले के दौरान मूकदर्शक बनी रही।
इसके तीन दिन बाद ही हरियाणा पुलिस ने पंजाब ले जाये रहे विस्फोटक का जखीरा बरामद किया। यह जखीरा पाकिस्तान और बांग्लादेश से नेपाल के रास्ते भारत लाया गया था। इस घटना के महज 24 घंटे के भीतर पंजाब के अलग-अलग इलाकों में ड्रोन से चार टिफिन बम गिराये गये, जिनमें से दो को तो बरामद कर लिया गया, लेकिन दो अन्य का अब तक पता नहीं चला है।
फिर पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की विधानसभा की चहारदीवारी पर खालिस्तान समर्थक पोस्टर और झंडे लगाये गये। इसके बाद मोहाली में पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा के मुख्यालय पर रॉकेट से हमला हुआ और अब हिमाचल प्रदेश में भी ऐसे ही हमले की धमकी दी गयी है।
आतंकी सरगना का वीडियो
यो तो घटनाएं हुई हैं, लेकिन इससे महत्वपूर्ण यह जानना है कि इन सबके पीछे किसका हाथ है। अभी खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी ली है। उसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर इन घटनाओं की जिम्मेवारी लेते हुए कहा है कि आॅपरेशन ब्लू स्टार के 38वें साल में पावंटा साहिब में जून के महीने में अलग खालिस्तान की मांग उठायी जायेगी।
अब एक नजर पन्नू के वीडियो संदेश की बातों पर। इस आतंकी ने साफ तौर पर कहा है कि उसका संगठन खालिस्तान की मांग से कोई समझौता नहीं करेगा। इस वीडियो के अनुसार, धर्मशाला में लगाया गया खालिस्तानी झंडा उस सिख कार्यकर्ता के माध्यम से भेजा गया था, जो अरविंद केजरीवाल की मंडी जिले में हुई सभा में शामिल हुआ था। बताया गया है कि वह कार्यकर्ता पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ जनसभा में शामिल हुआ था। अपने वीडियो में गुरपतवंत पन्नू ने कहा, जब से अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने खालिस्तान समर्थकों को लुभाया है, तब से उन्हें पंजाब चुनावों में 60 लाख डॉलर (46.45 करोड़ रुपये) का डोनेशन गया है। सिख फॉर जस्टिस अपने उन कार्यकर्ताओं को खालिस्तान के जनमत संग्रह के लिए प्रयोग करेगी, जो भगवंत मान के करीबियों में से हैं। इसी वीडियो में पन्नू ने कहा, धर्मशाला से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को एक साफ संदेश गया है कि हिमाचल प्रदेश में भी खालिस्तान के जनमत संग्रह की मांग है। साथ ही एक बार फिर से यह पंजाब का हिस्सा होगा।
पाकिस्तान की साजिश का संदेह
इन तमाम आतंकी घटनाओं की जांच अभी चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि पन्नू के अलावा एक और आतंकी हरिंदर सिंह रिंदा के कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। रिंदा पहले एक गैंगस्टर था, जो बाद में आतंकवादी बन गया। पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों करनाल में जो चार संदिग्ध आतंकवादी गिरफ्तार हुए, उनमें से एक गुरप्रीत रिंदा के संपर्क में था।
रिंदा का नाम आते ही सुरक्षा अधिकारियों को इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान की साजिश का संदेह हुआ। रिंदा को भारत में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का हैंडलर माना जाता है। वह पाकिस्तान से ही अपनी गतिविधियां चलाता है। यही नहीं, पिछले दिनों पंजाब पुलिस ने जो तरनतारन से आरडीएक्स बरामद किया, उसका भी लिंक रिंदा से जुड़ा है। इससे साफ हो गया है कि पंजाब के रास्ते पूरे भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश रची जा रही है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ की तरफ से पंजाब में स्लीपर सेल को बढ़ावा दिया जा रहा है और उनको पैसे के अलावा अन्य प्रलोभन दिये जा रहे हैं। भारतीय केंद्रीय गुप्तचर एजेंसियों के अनुसार पंजाब में जमीन के भीतर काफी करंट पैदा हो रहा है और इसमें गैंगस्टर और बेरोजगार युवकों को खालिस्तान लहर से जोड़ा रहा है।
दरअसल पंजाब में आतंकवाद को जिंदा करने की नापाक कोशिश लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा की जा रही है, जिसके लिए पंजाब से फरार होकर पाकिस्तान में शरण ले चुके आतंकवादी बब्बर खालसा चीफ वधावा सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रंजीत सिंह नीटा, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के चीफ भाई लखबीर सिंह रोडे, खालिस्तान कमांडो फोर्स के परमजीत सिंह पंजवड़ का इस्तेमाल खुले तौर पर पाक की खुफिया एजेंसी आइएसआइ कर रही है।
केंद्रीय एजेंसियों के आला अधिकारियों के मुताबिक पंजाब में गैंगस्टर कल्चर काफी बढ़ चुका है और पांच हजार से अधिक युवा गैंगस्टरों के साथ जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, पंजाब में बेरोजगारी की दर बाकी राज्यों के मुकाबले अधिक है। राज्य में बेरोजगारी की दर 7.4 प्रतिशत है, जो केंद्रीय बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत से काफी अधिक है। इसका असर भी आतंकवाद को जिंदा करने की कोशिश पर हो रहा है। पंजाब के युवा हताश और निराश हैं। इसलिए उनको लालच के जाल में फंसाया जाना आसान है। सरकार की दिशाहीनता इस आग में घी का काम कर रही है।
इन तमाम घटनाओं से एक और बात सामने आती है और वह है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चर्चित कवि कुमार विश्वास का वह आरोप प्रमाणित होता नजर आने लगा है, जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर खालिस्तान समर्थकों के साथ गुप्त समझौता करने का आरोप लगाया था। इन तमाम घटनाओं के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुमार विश्वास का इशारा सही था। सबसे गंभीर सवाल यह है कि ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के जो नारे पंजाब में कई सालों से नहीं सुने गये, वो अब खुलेआम लगाये जा रहे हैं। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को देश को इसका जवाब देना ही होगा।
वैसे पूरी दुनिया जानती है कि खालिस्तान की अवधारणा ही भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है। पाकिस्तान परस्त खालिस्तान आंदोलन ने पंजाब को ही नहीं, पूरे देश को हिंसा का वह दौर दिखाया है, जिसने सिखों के सबसे पवित्र स्थल अकाल तख्त तक में सेना के टैंकों को घुसने दिया और स्वर्ण मंदिर परिसर की सफेद संगमरमर को खून से लाल होते देखा है। इतना ही नहीं, कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण पंजाब अस्थिरता के उस दौर से भी गुजर चुका है, जिसमें उसकी बदनामी ही हुई। लेकिन बाद में स्थिति को किसी तरह संभाला गया।
अब एक बार फिर वही खालिस्तानी समर्थक आवाज यदि पंजाब की हवाओं में गूंजने लगे, तो चिंता स्वाभाविक है। पंजाब के लोगों ने आम आदमी पार्टी को अपनी रहनुमाई के लिए चुना जरूर है, लेकिन पटियाला की घटना ने उनके माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। सीमावर्ती प्रदेश होने के कारण केंद्र सरकार को भी इस बारे में तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। आप के अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का सियासी स्वार्थ कुछ भी हो सकता है, लेकिन भारत की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत उन्हें भी नहीं दी जा सकती है। केजरीवाल को और भगवंत मान को पटियाला की घटना से उठे सवालों का जवाब देना ही होगा। दूसरी तरफ केंद्र सरकार को भी चाहिए कि वह पंजाब में हो रही घटनाओं पर बारीकी से नजर रखे और जरूरत पड़ने पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर भारत को तोड़नवाली ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दे। पंजाब में सिर उठा रहे खालिस्तानी समर्थकों को भी समझ लेना चाहिए कि यह नया भारत है, जो अपने खिलाफ होनेवाली किसी भी साजिश का तत्काल जवाब देने की हिम्मत और ताकत रखता है। पंजाब देश की आन-बान-शान का प्रतीक है और उसकी शानदार बलिदानी परंपरा पर पूरे देश को अभिमान है। अभिमान का यह भाव हमेशा कायम रहना चाहिए।