आजाद सिपाही संवाददाता
भुवनेश्वर। पटना में आयोजित बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के 42वें सम्मेलन के अवसर पर, ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा माननीय कुलपति प्रोफेसर चक्रधर त्रिपाठी को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे बिहार के माननीय राज्यपाल राजेंद्र बिश्वनाथ अर्लेकर द्वारा सम्मानित किया गया था। विश्वविद्यालय के अकादमिक और प्रशासनिक सलाहकार प्रोफेसर सुधेंदु मंडल की अध्यक्षता में परिसर में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। प्रोफेसर त्रिपाठी को हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राज्यपाल द्वारा प्रतिष्ठित आचार्य शिवपूजन सहाय स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के दो अतिथि प्रो डॉ जेबी पांडेय और डॉ हेमराज मीणा को भी क्रमश: आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा और राजा राधिका रमन प्रसाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रोफेसर एसके पालिता ने डॉ जेबी पांडे और प्रोफेसर एनसी पांडा ने प्रोफेसर हेमराज मीणा को सम्मानित किया। इस अवसर पर मंडल ने कहा कि कुलपति त्रिपाठी, डॉ जेबी पांडे और डॉ हेमराज मीणा को विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया है। डॉ एसके पालिता ने कहा कि आज हमारे लिए गर्व और गर्व का दिन है, क्योंकि ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के इन तीन प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने बिहार की धरती पर ओडिशा का नाम रोशन किया है। एनसी पांडा ने मंगलाचरण का पाठ किया और उन्हें बधाई दी। डॉ हिमांशु महापात्रा ने कहा कि प्रोफेसर त्रिपाठी की अकादमिक उत्कृष्टता से विश्वविद्यालय समुदाय बहुत प्रेरित हुआ है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने सभी को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ एक अच्छे मित्र के साथ जीवन जीने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की सलाह दी।

डॉ जेबी पांडेय ने कहा कि गौरव तब आता है, जब हमें लगता है कि हमने कुछ किया है और हमें सम्मान तब मिलता है जब दुनिया को लगता है कि हमने कुछ महत्वपूर्ण किया है। डॉ हेम राज मीणा ने बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ रुद्राणी मोहंती ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ फागूनाथ भोई ने किया। सभी शिक्षक और कर्मचारी कुलपति हैं। चक्रधर त्रिपाठी ने डॉ हेमराज मीणा और डॉ जंग बहादुर पांडेय को बधाई दी और शुभकामनाएं दीं।

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