रांची। राज्य में एमएलए फंड से दी गयी 1000 करोड़ से अधिक की राशि का हिसाब सालों से नहीं मिल रहा है। ग्रामीण विकास विभाग दो साल से सभी जिलों से हिसाब मांग रहा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी जिलों से नहीं भेजी जा रही है। गिरिडीह, हजारीबाग, धनबाद, दुमका जिलों में सर्वाधिक डीसी बिल लंबित है। इस संबंध में मुख्य सचिव स्तर से भी समीक्षा की गयी है। यह पाया गया कि अधिकांश जिलों में विधायक योजना, मुख्यमंत्री विकास योजना की बड़ी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है। डीसी बिल का हिसाब नहीं मिलने से राशि के गबन की भी आशंका जतायी जा रही है।
सभी जिलों को पांच से छह बार दिशा-निर्देश दिये गये हैं और कहा गया कि इस संबंध में विभागीय पत्र राशि का समायोजन लंबित है। महालेखाकार कार्यालय से लेकर मुख्य सचिव स्तर से भी इस संबंध में बार-बार स्मारित किया जा रहा है। विभाग ने विभिन्न मदों में यह राशि दी है, जिसमें प्रत्येक जिला में पांच से आठ करोड़ रुपये का हिसाब बकाया है। हालांकि सरकार के सख्ती के बाद इनमें कुछ राशि का समायोजन हुआ है, जिसकी सूची बनायी जा रही है। बता दें कि विधायक फंड से प्रत्येक विधायक को झारखंड में पांच-पांच करोड़ की राशि दी जाती है। राज्य में 82 विधायक हैं। ऐसे में 410 करोड़ रुपये प्रत्येक वित्तीय वर्ष दिये जाते हैं।
विधायक की अनुशंसा से उनके विधानसभा क्षेत्र में सड़क, पुल, सामुदायिक हॉल सहित अन्य सार्वजनिक और जनहित में कार्य कराये जाते हैं। जिलों को यह राशि दी जाती है। योजनानुसार राशि का आवंटन किया जाता है। डीसी बिल नहीं मिलने यह पता नहीं चल रहा है कि उक्त राशि से क्या कार्य किये गये।