-भूमिहारवाद एवं ब्राह्मणवाद पर जम कर बरसे नागमणि

-छठी बार चतरा लोकसभा से हाथी पर सवार होकर अपना भाग्य आजमाने चतरा पहुंचे नागमणि

प्रवीण रस्तोगी
चतरा। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं चतरा लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद नागमणि को चतरा पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। नागमणि की गिरफ्तारी 10 वर्ष पूर्व आचार संहिता के एक मामले में की गयी है। इस मामले मे व्यवहार न्यायालय द्वारा नागमणि को फरार घोषित किया गया है। जानकारी के अनुसार नागमणि बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने चतरा समाहरणालय स्थित जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय कक्ष पहुंचे थे। उसी दौरान चतरा पुलिस ने चतरा व्यवहार न्यायालय द्वारा जारी लाल वारंट के आधार पर चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। ज्ञात हो कि गिरफ्तारी के एक दिन पूर्व भी नागमणि के प्रस्तावक एवं समर्थक ने जिला निर्वाची पदाधिकारी सह उपायुक्त रमेश घोलप के समक्ष निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नागमणि का नामांकन पत्र दाखिल किया था। पांचवें चरण के चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन नागमणि बसपा उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय कक्ष में उपस्थित हुए थे। नागमणि के पुलिस हिरासत में लिये जाने के बाद नागमणि की पत्नी सुचित्रा सिन्हा ने अपना अलग नामांकन पत्र दाखिल किया।
पुलिस सिरसत में नामांकन कर न्यायिक हिरासत में जा रहे नागमणि ने मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रत्याशी कालीचरण सिंह एवं कांग्रेस प्रत्याशी केएन त्रिपाठी पर निशाना साधते हुए कहा कि ब्राह्मणवाद और भूमिहारवाद की सामंती सोच के द्वारा एक षडयंत्र के तहत मुझे न्यायिक हिरासत में भेजने का काम किया है, जिसमें पुलिस की संलिप्तता जगजाहिर है । उन्होंने कहा कि मैं पिछले दिनों कई बार चतरा का दौरा कर चुका हूं, लेकिन इस मुकदमे के बारे में पुलिस द्वारा कभी कोई सूचना नहीं दी गयी और ना ही न्यायालय द्वारा कोई नोटिस मिला । इसके कारण मुझे इस मामले की कोई जानकारी पूर्व से नहीं थी। नागमणि ने कहा कि मेरे शहीद पिता जगदेव प्रसाद ने नारा दिया था 10 का शासन 90 पर, नहीं चलेगा-नहीं चलेगा। सौ में 90 शोषित हैं 90 भाग हमारा है। उन्होंने कहा कि सामंती प्रवृत्ति के लोग शोषित दलित को दबाना चाहते हैं।

नागमणि की पत्नी सुचित्रा सिन्हा ने किया नामांकन पत्र दाखिल

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि के पुलिस सिरसत में लिये जाने के बाद उनकी पत्नी एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश कुमार की पुत्री सुचित्रा सिन्हा ने नामांकन करने के पश्चात मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सभी पार्टियां नागमणि की जीत से घबरा कर एक षडयंत्र के तहत उन्हें जेल भेजने का काम किया। इसलिए मैंने भी नामांकन किया। नागमणि की उम्मीदवारी पर न्यायिक अड़चन आने पर मैं चुनाव लड Þकर उनके सपने को सरकार करूंगी।

विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर चतरा लोकसभा क्षेत्र से छह बार भाग्य आजमा चुके हैं नागमणि

हमेशा पार्टी बदलने की परिपाटी बने चतरा लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद नागमणि चतरा लोकसभा से छह बार अपने भाग्य को आजमा चुके हैं, लेकिन उनकी किस्मत ने एक बार ही साथ दी और पांच बार धोखा दिया। सबसे पहले नागमणि ने वर्ष 1996 में कांग्रेस के टिकट पर चतरा लोकसभा क्षेत्र से अपना भाग्य आजमाया था, जिसमें उनके भाग्य ने साथ नहीं दिया और चुनाव हार गये। वर्ष 1998 में राजद के टिकट पर फिर एक बार चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें मुंह की हार खानी पड़ी। वर्ष 1999 में नागमणि ने पुन: राजद के टिकट पर एक बार फिर किस्मत अजमायी और वह चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच गये। अति महत्वाकांक्षी नागमणि ने केंद्र में एनडीए की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार बनते ही एनडीए में शामिल होकर केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री का पद संभाल लिया। वर्ष 2004 में फिर नागमणि भाजपा के टिकट पर चुनावी जंग में कूद गये, लेकिन उन्हें फिर एक बार चुनाव की हार का सामना करना पड़ा। किसी तरह लोकसभा में दोबारा पहुंचने के लिए नागमणि ने हर हथकंडा अपनाते हुए वर्ष 2009 में फिर भाजपा को छोड़ कर घर वापसी कह कर राजद का हाथ थाम लिया और चुनाव के मैदान में लालटेन लेकर कूद गये, लेकिन उनकी किस्मत ने यहां भी उनका साथ नहीं दिया और वह चुनाव हार गये। वर्ष 2014 में भाजपा राजद और कांग्रेस से टिकट पाने में असफल रहे नागमणि ने एक बार आजसू के टिकट पर लोकसभा जाने का मार्ग अपनाया, लेकिन इस चुनाव में उनकी जमानत तक नहीं बच पायी और फिर एक बार हार का सामना किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट की दौड़ में पीछे रह जाने पर नागमणि ने बसपा का थाम लिया और हाथी पर सवार होकर 2024 का चुनाव लड़ने चतरा लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाने के लिए कमर कस ली है।

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