रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुडुचेरी में एआइडीएमके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बधाई दी और केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ की जीत को अपेक्षित परिणाम बताया। दक्षिण भारत की राजनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने तमिलनाडु में सिनेमा के प्रभाव का उल्लेख किया और अभिनेता विजय के राजनीतिक भविष्य की संभावनाओं के साथ-साथ दक्षिण भारत के कई राज्यों में कांग्रेस की बढ़ती मजबूती की सराहना की।
असम के चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने गंभीर आरोप लगाये कि वहां परिसीमन के माध्यम से विधानसभा क्षेत्रों के स्वरूप को बदलकर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम ने असम की 17 सीटों पर अपनी शुरूआती उपस्थिति दर्ज करायी है, जहां पार्टी ने करीब 0.5 प्रतिशत वोट हासिल किये। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी वहां आने वाले समय में आदिवासी समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेगी। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर जेएमएम प्रवक्ता का रुख सबसे अधिक आक्रामक रहा।
उन्होंने इन परिणामों को अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और सेना के जवानों का अनुचित इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि लगभग 29 लाख मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित रखा गया। विपक्ष की एकजुटता पर बात करते हुए उन्होंने जेएमएम की तुलना ‘कीवी’ फल से की, जो बाहर से भले ही भूरा दिखे लेकिन भीतर से हरा होता है और शरीर में प्लेटलेट्स की तरह विपक्ष की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। झारखंड में संभावित परिसीमन के मुद्दे पर सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी इस पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने आशंका जतायी कि असम की तर्ज पर झारखंड में भी जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशें हो सकती हैं, जिसका पार्टी कड़ा विरोध करेगी। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में फिलहाल किसी बदलाव की संभावना नहीं है और इस विषय पर कोई भी नया आयोग वर्ष 2029 के बाद ही विचार कर सकेगा।



