पश्चिमी सिंहभूम। चाईबासा कोऑपरेटिव बैंक में खाताधारकों की रकम की कथित अवैध निकासी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में आखिरकार सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय के आदेश के बाद की गई। बताया गया है कि पीड़ितों ने पहले बैंक प्रबंधन और पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। अदालत ने शिकायतों को गंभीर मानते हुए पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया, जिसके बाद दोनों केस दर्ज किए गए।
पहला मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के इलीगढ़ा गांव निवासी अमृत लाल कालुंडिया से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके पिता स्वर्गीय मानसिंह कालुंडिया की स्वर्णरेखा परियोजना में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की राशि फर्जी तरीके से निकाल ली गई। शिकायत के अनुसार गांव के ही कुछ लोगों ने कथित तौर पर खुद को मृतक का पुत्र बताकर बैंक में फर्जी खाता खुलवाया और मुआवजे की रकम की निकासी कर ली। अमृत लाल कालुंडिया का आरोप है कि इस पूरे मामले में बैंक कर्मियों की मिलीभगत भी हो सकती है। विरोध करने पर उन्हें धमकी दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
दूसरा मामला चाईबासा के समीप मटकमहातु गांव की वृद्ध महिला जेमा कुई से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बैंक खाते से वृद्धावस्था पेंशन और जमा पूंजी की रकम उनकी जानकारी के बिना निकाल ली गई। शिकायत में कहा गया है कि जून 2022 से नवंबर 2024 के बीच लगातार खाते से निकासी होती रही। पीड़िता ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक, कैशियर और अन्य बैंक कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद मामले को दबाने के उद्देश्य से उनके खाते में कुछ राशि जमा कराई गई थी। दोनों मामलों में पुलिस अब बैंक खातों, निकासी से जुड़े दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर बैंक कर्मियों और आरोपितों से पूछताछ भी की जाएगी।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद बैंक के अन्य खाताधारकों में भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि बिना जानकारी के खातों से रकम निकाली जा सकती है, तो ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।



