लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनता काे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए याेगी कैबिनेट ने 3×800 मेगावाट क्षमता की नई तापीय ऊर्जा परियोजना सहित 12 अहम प्रस्तावाें काे मंजूर किया है। राज्य की इस 2400 मेगावाट क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 38,358 करोड़ रुपये लागत आएगी। इस परियोजना को प्रदेश सरकार एवं एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से स्थापित और संचालित किया जाएगा।

साेमवार काे मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में 12 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इनमें पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय नया आयोग करने, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को मंजूरी, लखनऊ मेट्रो विस्तार कर चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो कॉरिडोर काे कैबिनेट की हरी झंडी दे दी है।

कैबिनेट बैठक में नई तापीय ऊर्जा परियोजना काे लेकर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 4000 मेगावाट की नई तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है, जिससे प्रदेश की तापीय ऊर्जा क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है। अब सरकार इसे तीन गुना करने के लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रही है। यह नई परियोजना उसी संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऊर्जा मंत्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान एनटीपीसी के साथ इस परियोजना के लिए अनुबंध किया था। उन्हाेंने बताया कि आज मंत्रिपरिषद ने इस परियाेजना काे मंजूरी देना सरकार के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से प्रदेश में उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को सस्ती, पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बनता जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर घर, हर गांव और हर उद्योग तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाई जाए।

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