– छह नए चेहराें में से दाे कैबिनेट और चार काे बनाया राज्य मंत्री – दो राज्य मंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार के रूप में मिला प्रमोशन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के मंत्रिमण्डल विस्तार में छह नये चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें चार काे राज्यमंत्री और दाे काे कैबिनेट स्तर का मंत्री बनाया गया है। वहीं योगी सरकार के दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन किया गया है।
प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने रविवार काे जन भवन के गांधी सभागार में इन मंत्रियाें काे शपथ दिलायी। मंत्रिमंडल में जिन नए चेहराें काेजगह मिली है उनमें भूपेन्द्र चाैधरी, मनोज पांडेय, कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान, सुरेन्द्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं। योगी सरकार के जिन दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन हुआ है उनमें राज्य मंत्री सोमेन्द्र तोमर और राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। राज्य के भूपेन्द्र चाैधरी और मनाेज पांडे काे कैबिनेट मंत्री और कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान, सुरेन्द्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा काेराज्य मंत्री बनाया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे।
मंत्रिमण्डल विस्तार में यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और रायबरेली जिले से मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। प्रमोशन पाने वाले राज्य मंत्रियों में अजीत सिंह पाल और सोमेन्द्र तोमर ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।
भूपेंद्र चौधरी : पश्चिम यूपी में जाट राजनीति का चेहरा
भाजपा उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र से आते हैं। विधान परिषद सदस्य हैं और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायतीराज मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। ऐसे में भूपेंद्र चौधरी को पार्टी ने तोहफा दिया है।
मनोज पांडेय : सपा से आये बड़े ब्राह्मण नेता
मनोज पांडेय रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। वह सपा में बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में सक्रिय रहे हैं। अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके हैं लेकिन वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाते हुए भाजपा को समर्थन दिया। मनोज पांडेय को कैबिनेट में शामिल कर भाजपा ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपना संदेश दिया है। रायबरेली और अमेठी जैसे परंपरागत गांधी परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी उनका असर माना जाता है।
अजीत सिंह पाल : पिता की विरासत संभालते हुए समाज में प्रभावी
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार/राज्य मंत्री) अजीत सिंह पाल कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं। वे पूर्व भाजपा विधायक मथुरा प्रसाद पाल के बेटे हैं। पिता के निधन के बाद राजनीति में आए। उन्होंने रूस से पढ़ाई की है और केमिकल इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 2017 में पिता की मृत्यु के बाद उपचुनाव लड़ा और पहली बार विधायक बने, फिर 2022 में सिकंदरा से दोबारा जीतकर राज्य मंत्री बने।
डाॅ. सोमेंद्र तोमर : मेरठ के पुराने छ़ात्रनेता रहे हैं
डॉ. सोमेंद्र पहले ऐसे छात्र नेता हैं। छात्रसंघ से निकलकर मुख्य धारा की राजनीति में शीर्ष तक पहुंचे हैं। डाॅ. सोमेंद्र 1998-2004 तक एबीवीपी में रहे। 1998 में एबीवीपी के विवि मंत्री और 2004 में एबीवीपी पैनल से छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। 2004 में भाजयुमो के प्रदेश संयोजक रहे। 2012 में पहली बार सोमेंद्र तोमर को भाजपा ने टिकट दिया, लेकिन फिर बदल दिया गया। 2017 में उन्हें टिकट मिला और जीते । 2022 चुनाव में उन्होंने गठबंधन प्रत्याशी आदिल चौधरी को हराया। बागपत के खैली गाव निवासी सोमेंद्र मेरठ के शास्त्रीनगर में रहते हैं। उनके पिता महेंद्र सिंह तोमर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं।
कृष्णा पासवान: दलित प्रतिनिधित्व का दांव
कृष्णा पासवान दलित समाज, विशेषकर पासवान समुदाय में प्रभाव रखने वाली नेता हैं। वह फतेहपुर की खागा विधान सभा सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में पासवान वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा उन्हें मंत्री बनाकर अहम जिम्मेदारी दी है।
कैलाश राजपूत : कन्नाैज क्षेत्र के चर्चित चेहरा
लोधी राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कन्नौज जिले की तिर्वा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने भी राज्य मंत्री पद की शपथ ली है। तिर्वा और छिबरामऊ क्षेत्रों में उनकी गहरी पैठ है। कैलाश राजपूत की लोधी राजपूत वोटरों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। कैलाश राजपूत की कन्नौज जिले के लोधी राजपूत समाज के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। तिर्वा और छिबरामऊ क्षेत्रों में उनकी गहरी पैठ है।
सुरेंद्र दिलेर राजनीतिक परिवार के चेहरा
सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह मूल रूप से दलित समाज से आते हैं। साथ ही राजनीतिक प्रष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले दलित नेता हैं। उनके दादा किशन लाल दिलेर हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद और छह बार विधायक रहे। उनके पिता स्व. रवीर सिंह दिलेर हाथरस सीट से भाजपा के सांसद रहे। एक बार विधायक भी रहे। खैर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। सुरेंद्र दिलेर ने यहां भाजपा को मजबूत आधार दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
हंसराज विश्वकर्मा: ओबीसी राजनीति का मजबूत चेहरा
हंसराज विश्वकर्मा प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से विधान परिषद सदस्य हैं। वह भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिने जाते हैं। पूर्वांचल के वाराणसी, चंदौली, भदोही और आसपास के जिलों में विश्वकर्मा समाज में उनका प्रभाव देखा जाता है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले हंसराज विश्वकर्मा को जमीनी नेता माना जाता है। प्रधानमंत्री कई बार उनकी प्रशंसा कर चुके हैं। भाजपा के गैर-यादव पिछड़ा वर्ग को अपने साथ मजबूती से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा हंसराज विश्वकर्मा भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आने के कारण उनका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।



