गुमला: अलविदा अलविदा माहे रमजान खुतबे के साथ मुस्लिम धर्मावलंबियों ने माहे रमजान के आखिरी जुमे में अलविदा की नमाज अदा की। अलविदा जुमा की नमाज में नम आंखों के साथ रोजेदारों ने अल्लाह की बारगाह में अपने सर को झुकाया। शहर के सभी सात मस्जिदों में जु्मा की नमाज अदा की गई। जिसमें थाना रोड स्थित जामा मस्जिद में अलविदा जुमा की नमाज इमाम हजरत मौलाना अहमद अली मिस्बाही ने पढ़ाई। वहीं बाजार टांड़ स्थित गौसिया मोती मस्जिद में नमाज की इमामत कारी गुफरान अहमद ने की हुसैन नगर स्थित मस्जिद फैजान ए राजा मैं मौलाना साजिद मिस्बाही कादरिया मस्जिद में मौलाना मसूद रजा नईमी मस्जिद रजाई हबीब कारी रमजान मदीना मस्जिद में कारी अब्दुल रशीद वह मक्का मस्जिद में अलविदा जुमा की नमाज की इमामत फरमाई इस मौके पर अलविदा जुमा से संबंधित तकरीर करते हुए जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अहमद अली मिस्बाही ने कहा कि अब हम सबों के बीच से बरकत रहमत और मगफिरत वाला महीना माह-ए-रमजान रुखसत होने वाला है।
रमजान में सेहरी और इफ्तार की नेमतों से हम महरूम होने वाले हैं। इस माह में इबादतों का सिलसिला अब कम होने वाला है। तरावीह के मजे अब 11 माह के लिए हमें अलविदा कहने वाले हैं।मोमिनो और रोजेदारों के लिए यह सदमे जैसी बात है। रोजेदारों को रोजे की लज्जत अब एक साल के बाद ही मिल सकेगी उन्होंने कहा कि नम आंखों से हम रमजान को अलविदा कहने वाले हैं। रोजेदारों का दिल भर आता है। आंखें हम हो जाती हैं, जब माहे रमजान की रुखसत का समय करीब आता है। उन्होंने यह भी कहा कि रमजान के गुजरने का गम के साथ ईद की खुशी इसलिए मिलती है कि रोजेदारों का गम हल्का हो सके। इस मौके पर अंजुमन के सदर मोहम्मद इरशाद खान ने कहा कि रमजान के बाकी बचे दिनों में रोजेदार शांतिपूर्वक ढंग से रोजा रखे, इबादत करें और अल्लाह का शुक्र अदा करने के साथ-साथ अपने लंबी उम्र की दुआ मांगे। ताकि बार-बार रमजान जैसा पवित्र महीना देखने का और इस महीने में इबादत करने का मौका मिल सके।
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