रांची: झारखंड देश के उन राज्यों में से एक है, जहां कई पॉकेट में मलेरिया आतंक मचाता है। स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख ने सभी सिविल सर्जनों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। वहीं भारत सरकार की 63 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानी सुरक्षा कवच बनेगी। झारखंड के दुमका, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा, रांची जैसे कई जिलों में जहां मलेरिया का डंक ज्यादा तीखा होता है। अन्य जिलों से भी रोगियों का अस्पताल पहुंचने का क्रम शुरू हो जाता है। आंकड़ों की माने, तो झारखंड में इस वर्ष मई महीने तक 34 हजार से ज्यादा मलेरिया के रोगी दर्ज हो चुके थे। इनमें भी खतरनाक मलेरिया फैल्सिफेरम मलेरिया के मरीजों की संख्या 17 हजार तक पहुंच चुकी थी।
सभी जिले अलर्ट : स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक प्रमुख डॉ सुमंत मिश्रा राज्य सरकार मलेरिया से निबटने के लिए मुस्तैद हैं। सभी सिविल सर्जनों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। ग्रामीण इलाकों में 20 मई से 45 दिनों के लिए लगातार स्प्रे जारी है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस वर्ष 63 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानी झारखंड को दी जायेगी। प्रभावित इलाकों की जरूरत के अनुसार ये मच्छरदानी वितरित की जायेगी।
हर साल झारखंड वेक्टर बोर्न डिजीज के चपेट में होता है। समय रहते लार्वारोधी रसायन का छिड़काव,मेडिकेटेड मच्छरदानी का उपयोग और समय पर इलाज से मलेरिया को काबू में किया जा सकता है। लोगों को भी सुझाव दिये जा रहे हैं घरों के आसपास कहीं भी जलजमाव नहीं होने दें। किसी बर्तन आदि में बरसात का पानी जमा नहीं होने दें। साफ-सफाई का ख्याल रखें और नियमित मच्छरदानी का उपयोग करें।
बढ़ रहा है खतरनाक मलेरिया
चिंता की बात यह कि झारखंड में खतरनाक किस्म के मलेरिया, जिससे रोगियों की मौत तक हो जाती है, उसकी संख्या लगातार बढ रही है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ विजय कुमार सिंह बताते हैं कि उचित समय पर इलाज हो, तो दोनों मलेरिया का इलाज संभव है। पर खतरनाक फैल्सिफेरम मलेरिया की पहचान मुश्किल होती है और इसके मरीज भी हम तक देर से पहुंचते हैं। इस कारण इससे मौत की आशंका अधिक रहती है।