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    Home»Top Story»लाॅकडाउन में निर्माण कार्य वाले 2 करोड़ श्रमिकों को 4957 करोड़ रुपये की मिली सहायता
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    लाॅकडाउन में निर्माण कार्य वाले 2 करोड़ श्रमिकों को 4957 करोड़ रुपये की मिली सहायता

    shivam kumarBy shivam kumarJune 23, 2020No Comments2 Mins Read
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    नई दिल्ली : लाॅकडाउन के दौरान देशभर के लगभग दो करोड़ पंजीकृत निर्माण मजदूरों को 4957 करोड़ रुपये की नकदी सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत करीब 1.75 करोड़ लेने-देन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किए गए। साथ ही 1000- 6 हजार रुपये के बराबर प्रति श्रमिक नकदी लाभ के अतिरिक्त कुछ राज्यों ने अपने मजदूरों को भोजन तथा राशन भी उपलब्ध कराया है।
    भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) भारत में असंगठित क्षेत्र मजदूरों के सर्वाधिक निर्बल वर्ग हैं। वे अनिश्चित भविष्य के साथ बेहद कठिन स्थितियों में जीवन यापन करते हैं। उनमें से एक बड़ी संख्या अपने गृह राज्यों से दूर अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले मजदूर हैं। वे राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय भूमिका अदा करते हैं। फिर भी वे खुद को समाज के हाशिये पर पाते हैं। भवन और अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम, 1996 इन मजदूरों के रोजगार एवं सेवाओं की स्थिति को विनियमित करने एवं उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कल्याण उपायों को सुलभ कराने के लिए लागू किया गया। सेस अधिनियम के साथ इस अधिनियम ने उन्हें महामारी के कठिन समय में आजीविका उपलब्ध कराने के जरिये निर्माण मजदूरों को राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अधिनियम के तहत राज्य सरकारें अपने राज्य कल्याण बोर्डों के माध्यम से निर्माण मजदूरों के लिए कल्याण स्कीमों का निर्माण करने एवं उन्हें कार्यान्वित करने के लिए अधिदेशित हैं। फंड में निर्माण लागतों का 1 प्रतिशत सेस शामिल है जो राज्य सरकारों द्वारा लगाया और संग्रहित किया जाता है तथा कल्याण फंड को प्रेषित कर दिया जाता है।
    केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री द्वारा 24 मार्च, 2020 को सभी मुख्यमंत्रियों को ठीक समय पर एक परामर्शी भेज दिया गया, जिसमें राज्यों को सुझाव दिया गया कि वे अधिनियम के खंड 22 (1) (एच) के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मोड के जरिये निर्माण मजदूरों के बैंक खातों में पर्याप्त फंड का अंतरण करने के लिए एक स्कीम तैयार करें। निर्माण मजदूरों काे दी जाने वाली राशि का फैसला संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाना था जो उनके जीवन यापन के लिए आवश्यक होती। यह परामर्शी निर्माण मजदूरों के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों काे कम करने के लिए जारी किया गया था। श्रम एवं रोजगार सचिव द्वारा सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इसी प्रकार का एक पत्र भी लिखा गया था और समय-समय पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के द्वारा इसका उत्साहपूर्वक पालन भी किया गया।
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