रांची। झारखंड सरकार के एक फैसले का असर अब लोकायुक्त पर भी पड़ेगा। सरकार ने यह आदेश जारी किया है कि एसीबी उसी मामले की जांच करेगी या पीइ दर्ज करेगी, जिसमें सरकार से अनुमति मिली हो। अब लोकायुक्त अगर किसी भी मामले की जांच का आदेश देंगे, तो वह जांच नहीं होगी। उसे भी सरकार को अनुमति के लिए भेज दिया जायेगा। अभी यह सिस्टम है कि लोकायुक्त सीधे एसीबी के अधिकारी को पत्र लिख कर जांच का आदेश देते थे। अब लोकायुक्त के फैसलों को भी मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को भेजा जायेगा। इस फैसले को लोकायुक्त के अधिकारों में कटौती के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को यह फैसला इस कारण से भी लेना पड़ा, क्योंकि झारखंड में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में एक साथ कई एजेंसियां जांच करने लगीं। बता दें कि दो दिन पहले लोकायुक्त ने एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उस पर अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया था। समझा जाता है कि सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद ही उन्होंने सरकार द्वारा मदद नहीं किये जाने की बात भी कही थी। इससे पहले लोकायुक्त ने अपने पास आये मामलों की जांच निजी एजेंसियों से कराने का फैसला किया था। जानकार बताते हैं कि लोकायुक्त को ऐसा करने का अधिकार नहीं है।
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