दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जीवन पर कोई फिल्म या डॉक्यूमेंट्री बनाने पर रोक लगाने की मांग खारिज करने के सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया है। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने फिल्म और डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी।
सुनवाई के दौरान सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म को खोजने की काफी कोशिश की गई लेकिन नहीं मिली। तब न्याय फिल्म के निर्माता की ओर से वकील चंदर लाल ने कहा कि फिल्म रिलीज हो गई है। तब साल्वे ने कहा कि लापअलाप डॉट कॉम पर केवल ट्रेलर रिलीज की गई है। तब जस्टिस भांभानी ने कहा कि एक पक्ष फिल्म को रोकने के लिए आता है और दूसरे पक्ष को रिलीज करने का अधिकार मिला हुआ है। वो फिल्म को रिलीज क्यों नहीं करे। तब साल्वे ने कहा कि वे बड़े प्लेटफार्म पर फिल्म को रिलीज करना चाहते होंगे। तब कोर्ट ने पूछा कि रिलीज का क्या मतलब है। अगर वह लापअलाप पर उपलब्ध है तो क्या वह रिलीज होने की श्रेणी में नहीं आएगी। तब साल्वे ने कहा कि यह छोटा प्लेटफार्म है और इसके ज्यादा दर्शक नहीं होंगे, इसलिए इसे रिलीज हुआ नहीं कहा जा सकता है। तब चंदर लाल ने कहा कि इस फिल्म को अभी तक सवा लाख लोग देख चुके हैं। यह प्लेटफार्म भले ही नेटफ्लिक्स की तरह बड़ा नहीं हो लेकिन इस पर लोगों ने फिल्म देखी है।
न्याय फिल्म के निर्माता की ओर से वकील एपी सिंह ने कहा कि ये फिल्म 11 जून को रिलीज हो चुकी है। हाई कोर्ट पहले ही याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर चुका है। इस फिल्म को लाखों लोग देख चुके हैं। याचिकाकर्ता कह रहे हैं कि फिल्म में सुशांत के कपड़ों को दिखाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या कपड़ों पर भी किसी का कॉपीराईट होता है। उन्होंने कहा कि शशांक फिल्म रिलीज होनेवाली है जिससे लोगों को अच्छा मैसेज मिलेगा।
सुनवाई के दौरान चंदर लाल ने लापअलाप वेबसाईट पर फिल्म के दर्शकों की जानकारी साझा की। तब साल्वे ने कहा कि ये एक तरह की रिलीज हो सकती है लेकिन इससे हमारी याचिका अर्थहीन नहीं हो जाती है। तीन दूसरे प्रतिवादियों के खिलाफ भी याचिका दायर की गई है। अगर कल फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होती है तो ज्यादा लोग देखेंगे। फिलहाल नुकसान कम है। साल्वे ने बौद्धिक संपदा अधिकार और संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर फिल्म के रिलीज रोकने की मांग की। तब कोर्ट ने कहा कि ये फिल्म की रिलीज रोकने का केस नहीं है, इस पर नोटिस जारी किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान पिछले 23 जून को कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि इस मामले में सुनवाई की जल्दबाजी क्या है। क्या फिल्म रिलीज नहीं हुई है। अगर हम आपकी बात से सहमत हों और सिंगल बेंच के फैसले से असहमति जताएं तो हम क्या कर सकते हैं। क्या हम उस फिल्म का रिलीज रोक सकते हैं जो पहले ही रिलीज हो चुकी है। सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की ओर से पेश वकील जयंत मेहता ने कहा था कि हमारे मुताबिक अभी फिल्म रिलीज नहीं हुई है। तब वकील वेदांत वर्मा ने कहा कि फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म पर 11 जून को रिलीज हो चुकी है। न्याय फिल्म के निर्माता सरला सरावगी की ओर से वकील चंदर लाल ने कहा था कि फिल्म रिलीज हो चुकी है।
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पिछले 10 जून को सुशांत सिंह राजपूत के पिता कृष्ण किशोर सिंह की याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया था कि एक बात का पता चला है कि “न्याय”, “द जस्टिस”, “सुसाइड या मर्डर- ए स्टार वाज लॉस्ट” और ” शशांक” नाम की फिल्में बायोपिक और डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही है। याचिका में इस बात की आशंका जताई गई थी कि सुशांत सिंह राजपूत की जीवनी से संबंधित कई कहीं और अनकही बातों के आधार पर कहानियां, वेब सीरीज और फिल्में बनाई जा सकती हैं। कुछ लोग सुशांत सिंह राजपूत के निजी जीवन पर आधारित फिल्में या वेब सीरीज बना सकते हैं। इससे उनके परिवार के निजता के अधिकार का हनन होगा।