वाशिंगटन । भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बुधवार 21 जून से शुरू हो रही अमेरिका यात्रा से अमेरिकी सांसद खासे उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि मोदी की अमेरिका यात्रा से दोनों देशों के पुनर्गठन में तेजी आएगी। वे मानते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण बिंदु साबित होगी और दोनों देशों के एक साथ आगे बढ़ने का प्रमुख प्रतीक बनेगी।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 21 से 24 जून तक अमेरिका की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे 22 जून को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। इस यात्रा को लेकर उत्साहित रिपब्लिकन सांसद टॉड यंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा अमेरिका और भारत के संबंधों में एक महत्वपूर्ण बिंदु है। अमेरिकी सदन में इंडियाना का प्रतिनिधित्व करने वाले यंग ने कहा कि दोनों देशों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए।

सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष व रिपब्लिकन सांसद जॉन कॉर्निन ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से भारत-अमेरिका के पुनर्गठन में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि दोनों देश इतिहास की बातें कर सकते हैं, किन्तु अब हम वापस जाकर इतिहास बदल नहीं सकते। हम अपने मौजूदा वास्तविक खतरे पहचान सकते हैं। उन्होंने कहा कि चीन के साथ चल रहे सीमा युद्ध को लेकर भारत की चिंताएं सही हैं। कॉर्निन ने कहा कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक अमेरिकी निवेश के लिए खोलने और हमारे साथ काम करने से लाभ होगा। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा हमारे एक साथ बढ़ने का बहुत महत्वपूर्ण प्रतीक है। भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है और यह एक सकारात्मक संकेत है।

सांसद मार्क वार्नर ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण करने वाले रूस के सैनिकों की तुलना में चीन के पास भारतीय सीमा पर अधिक खतरनाक सैनिक हैं। उन्होंने कहा कि यह ताइवान की समस्या नहीं है, यह चीन की समस्या है। भारतीय इसे पहचानते हैं। कांग्रेसी जुआन सिस्कोमनी ने कहा कि मोदी की ऐतिहासिक यात्रा को लेकर वे बहुत उत्साहित हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका और भारत के बीच इस रिश्तों के मामले में दोनों देशों का सम्मान अर्जित किया है।

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