रांची। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा पर पलटवार करते हुए कहा कि झामुमो की गठबंधन सरकार किसी भी सूरत में यहां के आदिवासी-मूलवासी का विकास नहीं चाहती। साढ़े चार वर्षों में यहां वायदे के अनुसार 22.5 लाख सरकारी नौकरियां होनी चाहिए थी लेकिन ये घोषणा हवा हवाई साबित हुई।

प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस सरकार की प्राथमिकता में सिर्फ खुद का विकास है। इसीलिए तमाम लीज सिर्फ सोरेन परिवार के सदस्यों और उनके करीबियों को मिला। आदिवासी मूलवासी अपने आप को इस सरकार में ठगा महसूस कर रहे हैं। अपने घोषणा पत्र में दिए गए एक भी वादे को ये पूरा नहीं कर पाए हैं। खतियान आधारित नियोजन नीति को भी इन्होंने जानबूझकर फंसा दिया। ओबीसी आरक्षण के लिए जरूरी ट्रिपल टेस्ट अभी तक शुरू नहीं हुआ। अबुआ आवास में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की खबरें आ रही हैं। यह पूरी तरह फ्लॉप सरकार है।

प्रतुल ने कहा कि आसन्न विधानसभा चुनाव के कारण झामुमो को आदिवासी मूलवासी की याद आ रही है। झामुने आदिवासी मूलवासी के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है। भाजपा का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास है। भाजपा की केंद्रीय कैबिनेट में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान दिया गया है। आदिवासी मूलवासी के नाम पर नाटक करने वाली झामुमो को थोड़ा मंत्रीगण मिथलेश ठाकुर और बन्ना गुप्ता के विषय में भी विस्तार से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वैसे झामुमो का केडी सिंह, मुक्तिनाथ उपाध्याय और आरके आनंद जैसे लोगों को राज्यसभा भेजने का पुराना रिकॉर्ड रहा है।

प्रतुल ने कहा कि इस बार के लोकसभा चुनाव में एनडीए 50 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रहा। राज्य के मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में उम्मीदवार को जीत नहीं दिला सके। यह गठबंधन सत्ता में रहने के बाद भी सिर्फ 29 सीटों पर सिमट गया। इनको 2024 के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के परिणाम की झलक दिख गई है। इसलिए वे बदहवास होकर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। अच्छा होता झामुमो अपनी चिंता करता।

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