-सरकार गठन के बाद पार्टी में कई बदलाव दिखने की संभावना
-रुपाला का बयान, नेतृत्व की टिकट बांटने में मनमानी, योगी का किनारा मुख्य वजह माना जा रहा
आजाद सिपाही संवाददाता
नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार सबसे चौंकने वाला है। भाजपा के लिए यह एक सबक है। इसे लेकर खुद भाजपा भी चिंतित है। मंथन शुरू हो गया है। अभी तक जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला का राजपूत शासकों पर बयान, नेतृत्व द्वारा टिकट देने में मनमानी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किनारा किया जाना माना जा रहा है। भाजपा सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में भाजपा की कार्यशैली और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी में कई बदलाव देखने को मिलेंगे।
चुनाव परिणाम के बाद पुरुषोत्तम रुपला ने कहा कि मेरी गलती थी, लेकिन पार्टी फंस गयी। यह मेरे लिए दुखद है, क्योंकि मेरी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परेशानी हुई। मैं पहले भी लोगों से माफी मांग चुका हूं।

लोगों को लगा होगा, मैं चुनाव की वजह से माफी मांग रहा। मैं एक बार फिर क्षत्रिय समाज से माफी मांग रहा हूं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट और योगी आदित्यनाथ पर शोध और सबसे अधिक लिखने वाली रीना सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ को नजरअंदाज किया जाना भाजपा को उत्तर प्रदेश में भारी पड़ा। योगी की कार्यकुशलता को नजरअंदाज किया गया। उनके खिलाफ कथित साजिश से जनता में निराशा थी। उसका परिणाम सामने दिखा। रीना सिंह ने यह भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जेल से बाहर आकर दो आरोप लगाये कि मोदी दो साल बाद प्रधानमंत्री पद से हट जायेंगे और योगी आदित्यनाथ को हाटाया जायेगा। पार्टी के बड़े नेताओं ने केजरीवाल के पहली बात का खंडन तो किया, लेकिन दूसरी बात योगी को हटाने पर कोई कुछ नहीं बोले। नड्डा आखिरी चरण में योगी के पक्ष में बोले, लेकिन तब तक भाजपा को नुकसान हो चुका था। रीना सिंह ने यह भी कहा कि टिकट बंटवारे में नेतृत्व ने योगी को दूर रखा। उधर, यह भी चर्चा है कि राजपूतों को टिकट देने में कोताही बरती गयी। उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, कांग्रेस समेत दूसरे दल से आये नेताओं को टिकट दिया गया। जिस वजह से पार्टी में अंदरूनी नाराजगी थी। साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का चुनाव के पहले आरएसएस को लेकर दिया गया बयान भी काफी असर कर गया। आरएसएस के लोगों ने चुनाव में दूरी बना कर रखी। ये तमाम बातें उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए घातक साबित हुईं।

सूत्रों की मानें तो भाजपा सरकार गठन के बाद तमाम बातों पर मंथन करेगी। हार के कारणों की समीक्षा होगी। ये तमाम बातें उसके सामने भी आयेंगी। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तथाकथित साजिश का भी खुलासा होगा। निश्चय ही राष्ट्रीय स्तर से प्रदेश स्तर तक कई बदलाव देखने को मिलेंगे, क्योंकि भविष्य में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में भाजपा को फिर से जगह बनाने के लिए कार्यशैली में सुधार तो करनी ही होगी।

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