ओरमांझी: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 70 साल तक लोगों ने आदिवासी समुदाय को धोखा दिया और सिर्फ उनके नाम पर राजनीति की। अब हमारी सरकार आदिवासियों के विकास के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद से हर गांव में 15-15 गरीब महिलाओं के समूह का सखी उद्यमी मंडल बनाया जायेगा। इन महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जायेगा। हमारा लक्ष्य गांव से गरीबी को समाप्त करना है। इसके लिए पहले चरण में 1200 पंचायतों से 100-100 युवाओं को हुनरमंद बनाया जायेगा। इन पंचायतों को हम गरीबी रेखा से बाहर लायेंगे। मुख्यमंत्री ने उक्त बातें शुक्रवार को ओरमांझी प्रखंड के टुंडाहुली पंचायत स्थित बाघिनबंडा सरना स्थल की घेराबंदी निर्माण कार्य का शिलान्यास करते हुए कही।
मानकी, मुंडा, पाहन और पुरोहित संस्कृति के संरक्षक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के रक्षक मानकी, मुंडा, पाहन और जनजातीय पुरोहित हमारे समाज के अभिन्न अंग हैं। इनका योगदान जनजातीय संस्कृति के विकास एवं संरक्षण में अमिट है। हमारी सरकार ने इनको मिलनेवाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ा दी है। समाज में समरसता बनाये रखने में इनकी भूमिका और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि आज से ही रांची जिला के 29 सहित राज्य के सभी 575 सरना/मसना स्थल की घेराबंदी और सौंदर्यीकरण के कार्य की शुरुआत की गयी है। अभियान के रूप में लेकर इसे पूरा किया जायेगा। जनजातीय समाज के सरना एवं मसना स्थल संस्कृति, परंपरा और भाषा की धरोहर हैं। पहली बार सरकार ने इनके विकास के लिए पहल की है।
गरीबों का सौदा करनेवालों से सतर्क रहें
सीएम ने कहा कि कुछ लोग आदिवासियों पर गिद्ध दृष्टि जमाये हुए हैं। वे उनकी गरीबी का सौदा करना चाहते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें झारखंड को समृद्धशाली और समरसता से परिपूर्ण बनाना है। जोहार योजना से जनजातीय समुदाय की महिलाओं को चार लाख रुपये की लागत से मुर्गीपालन करने में सहायता की जायेगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और बिचौलियों को दूर करने के लिए सरकार सारी सुविधाओं को आॅनलाइन कर रही है। गांव के युवाओं को भी कंप्यूटर का बेसिक कोर्स कराया जा रहा है, ताकि वे इसका लाभ उठा सकें। बच्चें ड्रॉप आउट न हों, इसके लिए बड़ी संख्या में छात्रावास बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही गरीबी से लड़ सकता है।
पाहन और ग्राम प्रधानों को किया सम्मानित
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पाहनों एवं ग्राम प्रधानों को भी सम्मानित किया और कहा कि वे गांव से गरीबी दूर करने में अपना अमूल्य योगदान दें। ये सभी उन 29 प्रखंडों से आये थे, जहां सरना/ मसना की घेराबंदी की शुरुआत की गयी है।
कार्यक्रम में सचिव हिमानी पांडेय, आयुक्त दिनेश चंद्र मिश्र, उपायुक्त मनोज कुमार, भाजपा नेता प्रो आदित्य साहू, 20 सूत्री उपाध्यक्ष जैलेंद्र कुमार, प्रमुख जय गोविंद साहू, मुखिया प्रतिमा देवी, पद्मश्री मुकुंद नायक, फूलचंद तिर्की, बबलू मुंडा और भाजपा नेता राजेंद्र केसरी उपस्थित थे।
सरना/मसना की घेराबंदी के शिलान्यास समारोह में कल्याण मंत्री लुइस मरांडी ने कहा कि यह आदिवासी समुदाय की काफी पुरानी मांग थी, पर किसी ने नहीं सुनी। इससे पहले तमाम आदिवासी मुख्यमंत्री रहे, पर उन्हें कभी जनजातीय संस्कृति के संरक्षण का खयाल नहीं आया। आज रघुवर सरकार आदिवासी हित, भाषा और संस्कृति को लेकर चिंतित है। सच्चे मायने में यह सरकार आदिवासी हितैषी है।
आदिवासियों को लेकर चिंतित है सरकार: नीलकंठ
मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि आदिवासी अपनी संस्कृति को लेकर चिंतित थे। रघुवर सरकार ने आदिवासियों की चिंता की है। इसी का नतीजा है कि आज सरना/ मसना स्थलों की घेराबंदी की जा रही है।
आदिवासी धर्म और अस्मिता बचाने का प्रयास : नवीन
विधायक नवीन जयसवाल ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी धर्म एवं अस्मिता बचाने के लिए प्रयत्नशील है। कई सरकारें आयी ंऔर गयीं पर किसी ने आदिवासियों की आत्मा और उनकी संवेदनाओं को नहीं समझा। किसी ने उनकी भावनाओं को समझा, तो वे हैं मुख्यमंत्री रघुवर दास।