टीम इंडिया एक बार फिर इंग्लैंड के खिलाफ कड़े टेस्ट सीरीज के मुहाने पर है और उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह का चोटिल होना है। इन दोनों पेसर्स की अनुपस्थिति में भारत का अटैक थोड़ा कमजोर हुआ है, लेकिन इनकी भरपाई करने के लिए मजबूत विकल्प मौजूद हैं। हम यहां पिछले कुछ समय के आधार पर टीम इंडिया के उस अटैक का छोटा सा विशलेषण पेश कर रहे हैं, जिनसे सभी को हर टेस्ट मैच में 20 विकेट निकालने की उम्मीद है।
भुवनेश्वर और बुमराह की अनुपस्थिति में अनुभवी ईशांत शर्मा पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ गई है। लंबे कद के इस पेसर को आईपीएल की नीलामी में किसी भी टीम ने इन्हें नहीं खरीदा, तो वह काउंटी खेलने इंग्लैंड चले गए। वहां चार मैचों में उन्होंने 23.06 के ऐवरेज से 15 विकेट झटके। इसके बाद वह रॉयल लंडन वनडे कप के छह मैचों में भी खेले, जिसमें उनका बेस्ट 3/47 का रहा। ईशांत ने अपना पिछला टेस्ट मैच बेंगलुरु में अफगानिस्तान के खिलाफ खेला था, जिसमें उन्होंने 45 रन देकर चार विकेट झटके थे।
यो-यो टेस्ट में फेल हो जाने की वजह से शमी अफगानिस्तान के खिलाफ हुए टेस्ट में चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। फिर उन्होंने बाद में यो-यो टेस्ट पास किया और इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में जगह बनाई। जनवरी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अच्छी टेस्ट सीरीज के बाद इस पेसर ने पिछले कुछ समय में ज्यादा क्रिकेट नहीं खेली है। शमी ने इंडिया-ए की ओर से 50 ओवर्स के दो मैच और आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की ओर से चार मैच खेले हैं। 27 साल के इस बोलर ने आईपीएल में 48 के ऐवरेज से तीन विकेट झटके थे।
आईपीएल में आरसीबी का प्रदर्शन एक बार फिर निराशाजनक रहा, लेकिन टीम के पेसर उमेश यादव ने 14 मैच में अच्छी बोलिंग करते हुए 20.90 के ऐवरेज से 20 विकेट झटके। इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में भी उमेश ने अपनी लय कायम रखी और पांच विकेट चटकाए। हालांकि वनडे सीरीज में उनके प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली। उन्होंने केवल दो मैचों में मौका मिला, जिसमें वह 44.33 के ऐवरेज से महज तीन विकेट ही ले पाए।
प्रतिकूल माहौल में अश्विन अपने प्रदर्शन में जरूर सुधार लाने की सोच रहे होंगे। साउथ अफ्रीका का उनका दौरा अच्छा रहा था जहां उन्होंने दो टेस्ट में 7 विकेट निकाले थे। आईपीएल की बात करें तो वहां उन्होंने 14 मैच में केवल 10 विकेट ही लिए थे और इसके लिए 410 रन लुटाए थे। आईपीएल के बाद अश्विन अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में भी उतरे और 5 विकेट झटके। इसके अलावा तमिलनाडु प्रीमियर लीग के मैचों में भी वह खेले।
आईपीएल में जडेजा की फिरकी चली और उन्होंने 27.54 के ऐवरेज से 11 विकेट चटकाए। वह अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में भी खेले और 35 रन देकर 6 विकेट झटके। हालांकि विदेशी पिचों पर जडेजा का भी रेकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। इंग्लैंड के पिछले दौरे पर जडेजा चार मैचों में केवल 9 विकेट ही निकाल सके थे। उनका ऐवरेज 46.66 का रहा था।
ऑलराउंडर हार्दिक का भी आईपीएल सीजन अच्छा रहा था। उन्होंने 13 मैचों में 21.16 के ऐवरेज से 18 विकेट झटके थे। इस लय को उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज में भी कायम रखा और सीरीज के हाइएस्ट विकेट टेकर बोलर बने। इस दौरान उन्होंने टी-20 करियर का अपना बेस्ट फिगर 4/38 भी निकाला। लेकिन वनडे सीरीज के तीन मैचों में हार्दिक के हाथ केवल एक विकेट लगा।
आईपीएल में शार्दुल ठाकुर का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। उन्होंनें किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से 13 मैचों में 16 विकेट लिए और उनका ऐवरेज 26.93 का रहा। आईपीएल के बाद ठाकुर ने इंडिया-ए की ओर से चार 50 ओवर्स के मैच खेले। इंग्लैंड लायंस के खिलाफ खेले तीन मैचों में उन्होंने 7 विकेट झटके और वेस्टइंडीज-ए के खिलाफ खेले एक मैच में एक विकेट लिया। 26 साल का यह बोलर इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में भारत की ओर से सर्वश्रेष्ठ बोलर रहा। ठाकुर ने उस मैच में अपने 10 ओवर के कोटे में 51 रन देकर एक विकेट निकाला।
टॉप फॉर्म में चल रहे चाइनामैन बोलर कुलदीप यादव इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में हाईएस्ट और टी-20 सीरीज में सेकंड हाइएस्ट विकेटटेकर बोलर रहे। इस दौरान उन्होंने टी-20 मैच में 5/24 और वनडे मैच में 6/25 का प्रभावशाली फिगर भी निकाला। हालांकि वनडे सीरीज के बाद के मैचों में कुलदीप ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहे, जिसका नतीजा यह रहा कि भारत ने सीरीज गंवा दी।