कोरोना की दूसरी लहर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। लोग परेशानी और असर से उभरे नहीं हैं। इस बीच तीसरी लहर की चर्चा शुरू हो गयी है। जितने वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हैं, वे उतनी तरह की बातें कर रहे। कोई तीसरी लहर अगस्त-सिंतबर में आने की बात कर रहा, कोई सितंबर-अक्तूबर में, तो कोई अक्तूबर-नवंबर में। इसी तरह इसके असर को लेकर भी मतभेद हैं। कोई बच्चों पर ज्यादा असर, तो कोई कम असर बता रहा। किसी की नजर में तीसरी लहर ज्यादा घातक होगी, तो किसी की नजर में कम। टीका के असर को लेकर भी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। इन मतभेदों के कारण लोगों में तीसरी लहर और टीकाकरण को लेकर असमंजस की स्थिति है। इसका नतीजा है कि लोग खौफ और चिंता में हैं। लोग आगे की कोई योजना तैयार नहीं कर पा रहे। आर्थिक गतिविधियों को गति नहीं मिल पा रही है।
किसने क्या कहा है
स्वास्थ्य मंत्रालय: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगले तीन-चार महीने यानी सिंतबर-अक्तूबर तक कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जतायी है।
एम्स निदेशक: एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि छह से आठ सप्ताह में तीसरी लहर आ सकती है। यानी उनके अनुसार अगस्त-सिंतबर में तीसरी लहर आयेगी।
आइआइटी कानपुर: आइआइटी कानपुर के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने गणितीय माडल सूत्र से बताया है कि कोरोना की तीसरी लहर की शुरूआत अक्टूबर के पहले सप्ताह से होगी और नवंबर में पीक आयेगा।
यह केवल तीन लोगों की राय है। ऐसे कई वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, एजेंसी हैं जो कोरोना पर काम कर रहे और उनकी मीडिया में अलग-अलग राय आ रही है। तीसरी लहर के प्रभाव को लेकर भी सभी एकमत नहीं हैं। वेरियेंट के बदलाव और इसकी मारक क्षमता पर भी अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञ पहले के मुकाबले ज्यादा घातक बता रहे। बच्चों पर असर बता रहे, तो कुछ विशेषज्ञ उनकी बातों को अपने शोध के आधार पर काट रहे।
सिंगल विंडो सिस्टम से बात आये सामने:
तीसरी लहर, टीके का असर, नये वेरियेंट या कोरोना को लेकर भविष्य का कोई भी आकलन, इस पर अलग-अलग शोध की रिपोर्ट मीडिया के जरिये लोगों के सामने आये यह सही नहीं है। इससे भ्रम की स्थिति बनी रहेगी। इससे बेहतर है कि एक सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था हो, जहां सभी अपने-अपने शोध पत्र को रखें और वहां से जांच परख के बाद एक सर्वसम्मति से सटीक बात सामने आये, जिस पर लोग भरोसा कर सकें और उसी के अनुसार कार्य करें।
तीसरी लहर आयेगी, यह तय है
कोरोना पर जितनी भी बातें अभी तक सामने आयी हैं, अगर सिंगल विंडो की तरह सोचें तो आपके सामने कुछ तथ्य जरूर होंगे। तीसरी लहर कितनी मारक होगी? बच्चे या बड़े किस पर अधिक असर होगा? नया वेरियेंट क्या असर डालेगा? टीका नये वेरियेंट पर असरदार है या नहीं? ये तमाम बातें अभी गर्भ में दिखेंगी। इनका सटीक जवाब मिलना भी मुश्किल है। इतना साफ है कि तीसरी लहर आयेगी। इसलिए हमें कोरोना प्रोटेकॉल का पालन करना चाहिए। मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग को नहीं भूलना चाहिए। साथ ही एक बात तो साबित हो ही गयी है कि टीका लगाने से कोरोना नहीं होगा, ऐसा नहीं है। इतना जरूर है कि कोरोना घातक साबित नहीं होगा। इसलिए कोई भी टीका लें, लेकिन लें जरूर।