उत्तरप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहरा दिया है। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि योगी का जलवा विधानसभा चुनाव में सिर चढ़ कर बोलेगा। भाजपा ने शानदार जीत हासिल करते हुए 75 में 67 सीटों पर कब्जा जमाया है। पंचायत अध्यक्ष चुनाव की जीत से पार्टी की अंदरूनी सियासत को एक संदेश भी मिल गया है कि ठोस रणनीति और थोड़ा परिवर्तन करने से जीत हासिल करना मुश्किल नहीं है। एक तरफ पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जहां अपनी कुशल रणनीति से योगी आदित्यनाथ ने अपना जलवा दिखा दिया है, वहीं इस चुनाव में फतह करने का सपना पाले सपा के अखिलेश यादव मुट्ठी भर सीट यानी पांच सीटों पर सिमट गये, तो कांग्रेस और बसपा खाता भी नहीं खोल सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी जीत का श्रेय योगी को ही दिया है। पार्टी के टॉप के दोनों नेताओं का योगी को श्रेय देना एक अलग संदेश दे रहा है। इससे पंचायत अध्यक्ष चुनाव के बाद उत्तरप्रदेश में सरकार और भाजपा को लेकर लग रहे कई तरह की अटकलों पर पूर्णविराम लग गया है। साथ ही यह भी दिखने लगा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में में ही भाजपा फाइनल मैच खेलेगी। इन परिणामों से योगी आदित्यनाथ खासा उत्साहित हैं और उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीट लाने का भरोसा दिलाया है। पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजों के मायने तलाशती आजाद सिपाही के राजनीतिक ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट।
उत्तरप्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले हुए पंचायत सदस्य चुनाव और अब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहा जा रहा है। पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा। इसके नतीजों से भाजपा नेतृत्व में खलबली मच गयी थी। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक भाजपा में तूफान मच गया था। सरकार में फेरबदल की बातें भी होने लगी थीं। पार्टी की अंदरूनी राजनीति को मानो पंख लग गया था। स्थिति कितनी चिंतनीय मानी जा रही थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंत में संघ को इसमें सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। उसने अपने आकलन के आधार पर एक तरह से वीटो जारी किया। उसके बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा हुआ। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं से मिले। वापस लौटे तो एक नये रंग और जोश के साथ। योगी आदित्यनाथ को खुली छूट मिली। इसका असर भी पड़ा। कुछ दिन में हालात बदल गये और पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने सारे रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया।
इतिहास दोहराया, रिकार्ड भी टूटा
जिला पंचायत अध्यक्ष के परिणाम ने एक बार फिर इतिहास को दोहराया है, साथ ही पुराने रिकार्ड को भी तोड़ दिया है। कहा जाता है कि जिसकी सरकार, उसकी जिला पंचायत। यह बात एक बार फिर साबित हो गयी है। पिछली बार सपा की सरकार थी, तो सपा का कब्जा था। इस बार भाजपा की सरकार है, तो भाजपा का कब्जा रहा। भाजपा ने पूर्व के रिकार्ड को भी तोड़ दिया है। पंचायत अध्यक्ष चुनाव 2016 में सपा के 63 जिलों में जीत का रिकार्ड था। इस बार भाजपा ने रिकार्ड तोड़ कर 67 पर कब्जा जमा लिया।
पश्चिम से पूरब तक दबदबा
उत्तरप्रदेश जिला पंचायत अध्यक्षों की 75 में से 67 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए हैं। पश्चिम से लेकर पूरब तक भाजपा ने दबदबा कायम रखा। भाजपा के संगठनात्मक क्षेत्रों की दृष्टि से पश्चिम क्षेत्र में 14 जिलों में से 13 में भाजपा और एक बागपत में रालोद ने चुनाव जीता है। ब्रज क्षेत्र के 12 जिलों में से 11 में भाजपा और एक एटा में सपा विजयी हुई है। कानपुर-बुंदेल खंड क्षेत्र की 14 में से 13 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। इटावा में सपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। अवध क्षेत्र के सभी 13 जिलों में भाजपा का कब्जा रहा। काशी क्षेत्र में 12 में से दस पर भाजपा ने चुनाव जीता है, जबकि जौनपुर में निर्दलीय और प्रतापगढ़ में जनसत्ता पार्टी ने चुनाव जीता है। गोरखपुर क्षेत्र में भाजपा ने 10 में से सात जिलों में जीत दर्ज की है। तीन जिलों में सपा को जीत मिली है। बलिया भाजपा के हाथ से फिसला है।
कांग्रेस और सपा के गढ़ हिले
प्रदेश के 22 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये गये हैं, जिनमें इटावा जिले को छोड़ कर 21 निर्वाचित अध्यक्ष सत्तारूढ़ भाजपा के हैं। इटावा में समाजवादी पार्टी को जीत मिली है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रहे अमेठी में भी भाजपा ने परचम लहराया है। वहीं सपा के प्रभाव वाले कन्नौज, मैनपुरी, फिरोजाबाद, बदायूं, फर्रुखाबाद, रामपुर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जैसे जिलों को भाजपा ने भेद दिया है।
मायने रखता है योगी को श्रेय देना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा की जीत पर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा: यूपी जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की शानदार विजय विकास, जनसेवा और कानून के राज के लिए जनता जनार्दन का दिया हुआ आशीर्वाद है। इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी जी की नीतियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम को जाता है। यूपी सरकार और भाजपा संगठन को इसके लिए हार्दिक बधाई। योगी आदित्यनाथ को जीत का श्रेय देने से उन सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है, जिसे लेकर कुछ दिन पहले यूपी के सियासी हलकों में तूफान मचा था। इस जीत की बधाई ने कहीं न कहीं सीएम योगी को एक बार फिर मजबूत होने का मौका दे दिया है। योगी की खुशी और उत्साह इस बात से भी झलक रही कि उन्होंने जीत के लिए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि फाइनल में 300 सीट पार करेंगे।
भाजपा के लिए संजीवनी, अन्य दलों के लिए सबक
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पार्टी और सरकार में अंदरूनी खींचतान शुरू हो गयी थी। पंचायत अध्यक्ष चुनाव ने उत्तरप्रदेश भाजपा को संजीवनी दे दी है। पार्टी नेता एक बार फिर एकजुट और एकमंच पर दिखने लगे हैं। यह भाजपा के लिए एक शुभ संकेत है, क्योंकि महज कुछ महीनों बाद ही विधानसभा चुनाव होने वाला है। यह एकजुटता आगामी चानव में काम आयेगी। इस जीत का लाभ यह भी होगा कि भाजपा की ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रियता और बढ़ेगी। वहीं सपा, बसपा, कांग्रेस और अन्य दलों के लिए पंचायत अध्यक्ष परिणाम एक सबक है। सपा की कई कमियां निकल कर सामने आयीं। सपा चुनावी प्रबंधन में फेल हुई। कई जिलों में अपनों ने खेल बिगाड़ा। पार्टी में दिग्गजों और बुजुर्ग नेताओं की कमी दिखी, जिसका असर चुनावी प्रबंधन पर पड़ा। कांग्रेस और बसपा को भी अपनी कमियों और खामियों को तलाशने का मौका मिला है। बहरहाल आगामी विधानसभा में जो भी हो, भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए तो पंचायत चुनाव अध्यक्ष के नतीजे उत्साहवर्धक हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का भी भविष्य के लिए आत्मविश्वास बढ़ेगा।