-कार्यकारिणी सदस्यों के पास पहुंची सूचना, शाम तक तय होगा नाम
झांसी। नगर निगम में उप सभापति के चुनाव की तारीख तय हो चुकी है। यह चुनाव 12 जुलाई को होने जा रहा है। इसके लिए कार्यकारिणी के सभी सदस्यों के पास पत्र भी भिजवा दिया गया है। कार्यकारिणी के 12 सदस्यों में से 9 सदस्य भाजपा के हैं। ऐसे में भाजपा का उप सभापति बनना लगभग तय है, लेकिन पद की लोलुपता के चलते 9 सदस्यों में से 5 ने उपसभापति के लिए दावा ठोका था। हालांकि समाचार लिखे जाने तक सूत्रों से खबर मिली है कि 5 में से दो ने दिग्गजों के हस्तक्षेप और समझाने के बाद कुर्सी का मोह छोड़ दिया है। उपसभापति के लिए 3-3 लोगों के दावों को देखते हुए भाजपा में असमंजस की स्थिति बन गई है। अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए सदस्य अब तर्क भी दे रहे हैं। वहीं जिन दो लोगों को समझाया गया है उसका भी आधार बताया गया है। इसमें दलित वर्ग से स्वयं महापौर चुने गए हैं। जबकि महिला उपसभापति के रूप में हाल ही में 5 बार की पार्षद सुशीला गोकुल दुबे ने कार्यकाल समाप्त किया है। गौरतलब है कि नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जून में 6 नए सदस्य बनाए गए। दावा किया गया था कि भाजपा सभी 6 सदस्यों को जिताकर कार्यकारिणी में अपनी ताकत बढ़ाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बहुमत का आंकड़ा दूर होने के कारण भाजपा ने 5 सदस्य ही मैदान में उतारे तो 1 सदस्य विपक्षी खेमे से जीतकर आ गया। पहले की तरह ही कार्यकारी में 9 सदस्य भाजपा के हैं, जबकि 3 सदस्य विपक्ष के हैं। अब उप-सभापति चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विपक्ष फिलहाल उपसभापति चुनाव की दौड़ से अपने-आप को बाहर रखे हुए है।
इन सदस्यों ने ठोका था दावा
9 सदस्यों में से अब तक 5 ने उप सभापति की कुर्सी के लिए अपना दावा ठोका है। इस रेस में 4 बार के पार्षद, नेता सदन व पूर्व उपसभापति रह चुके दिनेश प्रताप सिंह उर्फ बण्टी राजा के अलावा दो बार के पार्षद विभिन्न पार्टियों में पकड़ रखने वाले और दो वर्ष से भाजपा में आए मुकेश सोनी और पहली बार पार्षद बनकर कार्यकारिणी में पहुंचे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तेज तर्रार युवा नेता प्रवीण लखेरा प्रवल दावेदार हैं। वहीं, 2 बार के पार्षद प्रदीप खटीक व प्रियंका साहू को समझाने का दौर जारी बताया जा रहा है।
विपक्ष की नजर भाजपा की रणनीति पर
उप सभापति पद के चुनाव को लेकर वैसे तो विपक्ष पूरी तरह से बैकफुट पर है, लेकिन भाजपा के लोगों की जद्दोजहद को देखते हुए उनकी रणनीति पर नजर टिकाए हुए है। दरअसल, विपक्ष के पास कार्यकारिणी में सिर्फ 3 सदस्यों का ही बहुमत है, जबकि भाजपा के पास 9 सदस्य व महापौर का मत भी है। विपक्ष इस ताक में है कि भाजपा का दावेदार फाइनल होने के बाद अगर कोई बगावत होती है तो उसका फायदा उठाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि इसकी संभावना न के बराबर ही है। देखना यह है कि आखिर लोकसभा चुनाव के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए न थकने वाली भाजपा वरिष्ठ, समर्पित युवा अथवा हाल ही में जुड़े अपने कार्यकर्ताओं में से किस कार्यकर्ता पर दांव लगाती है। इस संबंध में भाजपा महानगर अध्यक्ष हेमन्त परिहार ने बताया कि कई लोगों ने दावा ठोका है। आज शाम तक कोर कमेटी के लोग बैठेंगे। सामूहिक तौर पर जो नाम निकलेगा वही उपसभापति के लिए तय कर दिया जाएगा।