रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 105 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने 23 जुलाई को इस संबंध में आदेश जारी किया। स्वीकृत राशि का उपयोग नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में शहरी परिवहन से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।
सरकार ने इस राशि को तीन अलग-अलग प्रक्षेत्रों में आवंटित किया है। ओएसपी (OSP) प्रक्षेत्र के तहत 25 शहरी निकायों को 43 करोड़ 65 लाख 90 हजार रुपये दिए गए हैं, जिनमें धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग और मेदिनीनगर सहित अन्य नगर निकाय शामिल हैं। वहीं, एससीएसपी (SCSP) प्रक्षेत्र के अंतर्गत 49 शहरी निकायों के लिए 9 करोड़ 74 लाख 40 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सूची में रांची, देवघर, बोकारो और जमशेदपुर अक्षेस समेत कई अन्य शहरी निकाय शामिल हैं।
टीएसपी (TSP) प्रक्षेत्र के तहत सबसे अधिक 51 करोड़ 59 लाख 70 हजार रुपये 24 शहरी निकायों के लिए आवंटित किए गए हैं। इस श्रेणी में रांची, गुमला, लोहरदगा, दुमका और अन्य क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत राशि का उपयोग केवल शहरी परिवहन सुविधाओं के विकास पर ही किया जाएगा। इसके तहत सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण, पुलों का निर्माण, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करना, बस स्टैंड और बस स्टॉप का विकास जैसे कार्य किए जाएंगे। विभाग ने निर्देश दिया है कि इस राशि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा।
योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विभाग ने कई निर्देश जारी किए हैं। सभी कार्य प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाएंगे और प्रयास होगा कि इन्हें चालू वित्तीय वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाए। संबंधित निकायों को योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की नियमित रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध करानी होगी।
इसके अलावा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी भी योजना या भुगतान में दोहराव न हो। साथ ही झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011, झारखंड कोषागार संहिता-2016 और वित्त विभाग के सभी प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा विभाग को योजनाओं से जुड़े सभी अभिलेखों, रजिस्टरों और दस्तावेजों की जांच का अधिकार होगा, ताकि खर्च और कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
सरकार का मानना है कि इस निवेश से राज्य के छोटे और बड़े शहरों में सड़क और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे लोगों को बेहतर यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम बनेगा।



