रांची: झारखंड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने धर्मांतरण को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। मरांडी ने कहा कि इस बिल को कैबिनेट से पास करवाकर राज्य सरकार ने यह और स्पष्ट कर दिया है कि उसे संवैधानिक प्रावधानों की कोई चिंता नहीं है। बुधवार को मरांडी ने कहा कि प्रदेश में बीजेपी की जब से सरकार आयी है, तब से नियम और कानून को ताक पर रख दिया गया है। विधानसभा चुनाव के बाद झाविमो के 6 विधायकों को बीजेपी तोड़ कर ले गयी, जो कानून का उल्लंघन है। उनके सामने कानून-कायदा का कोई महत्व नहीं है।
मरांडी ने कहा कि धर्मांतरण विधेयक 2017 भारत के नागरिक के मौलिक अधिकार का हनन है। मौलिक अधिकार में स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार अपना धर्म, उसका प्रचार-प्रसार स्वतंत्र रूप से कर सकता है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के आने के बाद अब अगर किसी को धर्मांतरण करना है, तो उसकी सूचना जिले के उपायुक्त को लिखित में देनी होगी। अगर किसी व्यक्ति का धर्मांतरण जबरन होता है, तो उसके लिए पहले से आइपीसी के चैप्टर 15 और 295 में प्रावधान है। इस मामले में बीजेपी जानबूझ कर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जेवीएम इसका लगातार विरोध करेगा। सड़क से लेकर सदन तक पार्टी की ओर से इस विधेयक का विरोध किया जायेगा।
चुनावी खर्चे के लिए सरकार बेच रही शराब
शराब विक्रय मामले में कहा कि सरकार अब खुद शराब की बिक्री कर रही है, जो राज्यहित के लिए गलत है। सरकार 2019 के चनाव के लिए अवैध तरीके से पैसे जुटाने का काम कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
सीएनटी-एसपीटी एक्ट पर सीएम को भेजा पत्र
सीएनटी-सपीटी संशोधन मामले पर उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखा है। इसमें यह अंकित है कि सरकार हड़बड़ी में कोई फैसला न ले। नीतीश के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर कहा कि यह नीतीश कुमार का व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि अब नीतीश कुमार से उनका कोई संपर्क नहीं है।