राजीव
रांची। कभी झारखंड की शान कही जानेवाली उषा मार्टिन पर शिकंजा कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने कंपनी के वायर रोप डिवीजन (टाटीसिल्वे) की 190 करोड़ की संपत्ति अटैच करने का आदेश दिया है। इडी के नौ अगस्त को जारी आदेश की सूचना उषा मार्टिन की कंपनी सचिव शंपा घोष राय ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सचिवों के अलावा लग्जमबर्ग के स्टॉक एक्सचेंज को भी दी है। इडी के आदेश के साथ ही झारखंड में टाटा के बाद निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी की मुसीबतें बढ़ गयी हैं।
स्टॉक एक्सचेंज को क्या लिखा है कंपनी ने
उषा मार्टिन ने इन स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया है कि प्रवर्तन निदेशालय, पटना ने नौ अगस्त को एक आदेश पारित किया है, जिसमें उसने कंपनी के टाटीसिलवे स्थित वायर रोप डिवीजन की करीब 190 करोड़ की अचल संपत्ति को अटैच कर दिया है। पत्र के अनुसार इडी ने इस संपत्ति को 180 दिन की अवधि के लिए अटैच करते हुए कंपनी को इडी की सहमति के बिना इन संपत्तियों को हस्तांतरित या बेचने से मना कर दिया है।
क्यों हुई है कार्रवाई
इडी ने यह आदेश पश्चिमी सिंहभूम की घाटकुरी खदान से गलत तरीके से निकाले गये लौह अयस्क की बिक्री के मामले में दिया है। यह खदान उषा मार्टिन को उसके निजी इस्तेमाल के लिए आवंटित की गयी थी। इधर कंपनी की तरफ से सूचित किया गया है कि झारखंड हाइकोर्ट ने 14 फरवरी, 2012 के अपने फैसले में कंपनी द्वारा लौह अयस्क की बिक्री को वैध ठहराया था, इसलिए कंपनी इडी के आदेश के खिलाफ कानूनी राह अपनायेगी और विरोध करेगी। कंपनी इस मामले में कानूनी राय ले रही है। पत्र में कहा गया है कि इडी के आदेश का कंपनी के दैनिक कामकाज या आॅपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बता दें कि उषा मार्टिन को अभी राजीव झवर और उनके पिता ब्रजकिशोर झवर चला रहे हैं।
मुसीबतों की शुरुआत
उषा मार्टिन को कभी झारखंड की शान कहा जाता था। बसंत कुमार झवर द्वारा 1960 में स्थापित उषा मार्टिन दुनिया में वायर रोप बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी थी। इस कंपनी ने 1963 से लाभ कमाना शुरू किया। लेकिन बसंत झवर ने वर्ष 2000 में कंपनी की कमान अपने भतीजे राजीव झवर को सौंप दी। उसके बाद कंपनी के बुरे दिन शुरू हो गये। राजीव ने अपने सलाहकारों के साथ मिल कर कंपनी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की और देश-विदेश में संपत्ति अर्जित की। इस दौरान उषा मार्टिन की हालत खराब होती गयी। कंपनी कर्ज के जाल में फंसती गयी और इसका परिणाम यह हुआ कि इसके इस्पात डिवीजन को बेचना पड़ा। टाटा समूह की टाटा स्पांज ने आदित्यपुर स्थित उषा मार्टिन के इस्पात संयंत्र को खरीद लिया। इस सौदे के दौरान ही राजीव झवर और उनके सलाहकारों द्वारा बरती गयी अनियमितता की जानकारी सामने आयी। हालत यहां तक पहुंच गयी कि बसंत झवर को सार्वजनिक रूप से कहना पड़ा कि उनके साथ धोखाधड़ी की गयी और यह धोखाधड़ी किसी और ने नहीं, बल्कि उनके सगे भतीजे ने की। कंपनी की हालत इतनी खराब हो गयी कि इसके वायर रोप डिवीजन में न तो आधुनिकीकरण हुआ और न ही यहां कार्यरत कामगारों का वेतन आदि का पुनरीक्षण हुआ।
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