कोरोना से जंग: राज्य में एक करोड़ से अधिक लोग ले चुके हैं वैक्सीन
पूरा विश्व कोरोना संक्रमण से लड़ रहा है। भारत भी इस लड़ाई में शामिल है। झारखंड इस संक्रमण से अछूता नहीं है। यहां भी स्वास्थ्य सेवा, लोगों में जागरूकता, टीकाकरण समेत हर स्तर पर लड़ाई जारी है। टीकाकरण जनवरी से चरणबद्ध शुरू हुआ। पहले हेल्थ वर्कर और फ्रंट वर्कर को दिया गया। इसके बाद बुजुर्गों और मध्य आयु वर्ग के लिए टीकाकरण शुरू हुआ। फिर युवाओं की बारी आयी और उनका टीकाकरण शुरू हो गया। मई से 18 प्लस वाले सभी को टीका दिया जा रहा है। केंद्र सरकार टीका मुहैया करा रही है और राज्य सरकार पूरा चेन तैयार कर जिला और गांव तक टीकाकरण कर रही है। एक अच्छी बात है कि टीकाकरण का पूरा चेन तैयार हो गया है और व्यवस्थित रूप से टीकाकरण हो रहा है। जैसे-जैसे टीका उपलब्ध हो रहा, लोगों को मिल रहा। यह अलग बात है कि उपलब्धता के अनुसार किसी दिन कम किसी दिन ज्यादा टीकाकरण होता है। पर टीकाकरण ने एक राह पकड़ ली है। टीकाकरण का मतलब हम कोरोना की जंग जीत गये यह कतई नहीं है। कोरोना से बचाव के लिए प्रोटोकॉल को मानना जरूरी है। यानी मास्क पहनना, हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाये रखना होगा। इसमें लापरवाही दिख रही है। पुलिस-प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हर व्यक्ति मास्क पहने इस बात को पटरी पर लाना होगा। राज्य में कोरोना मामले, टीकाकरण और प्रोटोकॉल का पालन की स्थिति को खंगालती आजाद सिपाही के सिटी एडिटर राजीव की रिपोर्ट।
साल 2020 को कोरोना वायरस महामारी की वजह से भविष्य में हमेशा याद किया जायेगा। डेढ़ साल बाद भी कोरोना का प्रकोप अभी पूरी दुनिया झेल रही है। पूरे विश्व में इसे महामारी घोषित किया गया। कोरोना की शुरूआत चीन के वुहान शहर से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार वुहान में 31 दिसंबर 2019 को कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। भारत में सबसे पहले कोरोना संक्रमण का मामला 30 जनवरी 2020 को केरल में सामने आया था। वायरस से संक्रमण का पहला शिकार 20 साल की युवती थी। वह युवती 25 जनवरी 2020 को चीन के वुहान शहर से लौटी थी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में कोरोना संक्रमण फैला। पहली लहर किसी तरह निपटी। पूरा विश्व इसका टीका ढूंढने में लग गया। भारत में भी इसके लिए प्रयास शुरू हुए। दिसंबर 2020 में टीका आया। भारत में जनवरी 2021 से टीकाकरण शुरू हुआ। देश में अब तक 49.10 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है। वहीं झारखंड में अब तक 1.01 करोड़ लोगों को टीका लगा है। टीकाकरण के शुरूआत में इसका विरोध तीव्र था। देश के विभिन्न हिस्सों से टीका लेने का विरोध हो रहा था। सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हो रहे थे। टीका को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैली हुई थीं। कोई टीका लेने से नपुंसक, तो कोई मौत होने तो कोई अन्य बात का जिक्र कर रहा था। यहां तक की कई जगहों से कोरोना टीकाकरण टीम को भगाया जा रहा था। टीकाकरण केंद्र पर लोग पहुंच नहीं रहे थे। इस बीच दूसरी लहर आ गयी। दूसरी लहर ने लोगों को टीकाकरण के फायदे से अवगत कराया। साथ ही सरकार ने टीका लेने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया। समय से साथ-साथ स्थिति बदली और टीका के लिए लोग धीरे-धीरे आगे आने लगे। अब टीका का विरोध लगभग समाप्त हो गया है। ज्यादातर लोग टीका लगाने के लिए इच्छुक दिख रहे हैं। अब तो धीरे-धीरे यह हो रहा कि जिस व्यक्ति ने टीका नहीं लिया है, उसे ही दूसरी नजर से देखा जा रहा है। इसी का नतीजा है कि हर दिन भारी संख्या में लोग टीका लेने पहुंच रहे हैं।
झारखंड में टीकाकरण की स्थिति अच्छी
राज्य में टीकाकरण की स्थिति अच्छी है। केंद्र ने अभी तक राज्य को एक करोड़ एक लाख 66 हजार 910 टीके उपलब्ध कराये हैं। इनमें से 1 करोड़ 09 हजार 063 लोगों को टीका दिया गया है। अभी तक 80 लाख 92 हजार 597 लोगों ने पहला डोज और 19 लाख 16 हजार 597 ने दूसरा डोज लिया है। टीकाकरण शुरू होने के बाद युवाओं की मई से टीका लेने की बारी आयी। उनमें काफी जोश है। राज्य में अब तक 60 फीसदी युवा (18 से 44 वर्ष) पहला डोज और 25 फीसदी दूसरा डोज ले चुके हैं। वहीं हेल्थ वर्कर में पहला डोज 81 फीसदी और दूसरा डोज 94 फीसदी ने लिया है। फ्रंट लाइन वर्कर में पहला डोज 76 फीसदी और दूसरा डोज 91 फीसदी ने लिया है। अगर 45 से 59 वर्ष के लोगों की बात की जाये, तो 54 फीसदी ने पहला और 40 फीसदी ने दूसरा डोज ले लिया है। 60 से ऊपर के लोग भी टीका लेने में पीछे नहीं हैं। इस श्रेणी के 47 फीसदी ने पहला और 45 फीसदी ने दूसरा डोज लिया है।
टीकाकरण एक व्यवस्था के तहत हो रहा
राज्य में टीकाकरण की व्यवस्था ठीक है। केंद्र सरकार से प्राप्त होने की सूचना हर महीने पहले ही मिल जाती है। केंद्र से सूची भेज दी जाती है, किस दिन कितना टीका मिलेगा। राज्य सरकार ने भी पूरी चेन को तैयार कर लिया है। इसका एक सिस्टम तैयार हो गया है। केंद्र से टीका प्राप्त होने, जिला और गांव तक पहुंचने और लोगों को टीका लगने की एक व्यवस्था बन गयी है। इस पर सिर्फ अब नजर रखने की जरूरत है। जिससे चेन ठीक तरीके से काम करती रहे। अब सरकार को दूसरी व्यवस्था यानी कोरोना फिर पांव नहीं पसारे इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग पर ध्यान देने की जरूरत
कोरोना की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। विशेषज्ञ, डॉक्टर, शोधकर्ता हर तरफ से तीसरी लहर की बात की जा रही है। केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बढ़ते मामले लगातार तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हंै। ऐसे में मास्क नहीं पहनना भारी पड़ सकता है। यह केवल आपके या आपके परिवार के लिए नहीं, पूरे समाज के लिए भारी पड़ेगा। इस बात अनुभव हम कोरोना के पहली और दूसरी लहर में कर चुके हैं। कोरोना गरीब, अमीर, युवा, वृद्ध आदि को देख कर नहीं हो रहा। यह किसी को भी अपने चपेट में ले सकता है। हमें कोरोना नहीं होगा। हमने टीका ले लिया है, हम सुरक्षित हैं। ये तमाम बातें गलत साबित हो रही हैं। इसलिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना जरूरी है। जबकि इससे उलट देखा जा रहा है। बाइक वाले डर से मास्क तो लगा लेते हैं, क्योंकि पुलिस उन्हें पकड़ रही। पर सड़क पर, बाजार में और अन्य जगहों पर कई लोग मास्क नहीं लगाये हुए दिखते हैं। कई लोग मास्क पहनते भी हैं, तो सही तरीके से नहीं। मास्क नाक से नीचे केवल दिखावे के लिए लटकाये हुए दिखते हंै। वहीं लोग कई जगह सामान खरीदने या अन्य कार्यों के लिए भीड़ लगाये भी दिख जाते हैं। आॅटो में प्रोटोकॉल के अनुसार जितनी सवारी को बिठाना है, उससे अधिक दिखते हैं। वह भी बिना मास्क के बैठे रहते हैं। प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। थोड़ी कड़ाई के साथ मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही लोगों को भी खुद में सुधार की जरूरत है।
कोरोना अभी गया नहीं, बंदी पर से पाबंदी हटी है
देश या राज्य से कोरोना अभी गया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर 40 से 50 हजार नये कोरोना मरीज हर दिन मिल रहे हैं। झारखंड में 30 से 40 नये मरीज हर दिन मिल रहे। अभी सक्रिय मरीजों की संख्या 223 है। राज्य में 24 जिलों में शायद ही कोई जिला अछूता है, जहां हर कुछ दिन पर नये मरीज नहीं मिल रहे। कोई भी जिला ऐसा नहीं है, जहां सक्रिय मरीज नहीं हैं। पिछले 24 घंटे में 14 जिले ऐसे हैं, जहां एक न एक नया कोरोना मरीज मिला। यानी कोरोना अभी गया नहीं है। दूसरी लहर कम हो गयी है। तीसरी लहर की आशंका जतायी जा रही है। इसलिए सतर्कता की जरूरत है। सरकार ने लॉकडाउन में ढील दी है। पाबंदी अभी हटी है, कोरोना नहीं गया है। इसलिए हमें कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। मास्क पहनना चाहिए। सोशल डिस्टेंसिंग अपनाना चाहिए। जहां तक संभव हो कम से कम घर से बाहर निकलना चाहिए और भीड़भाड़ से तो बचना ही चाहिए। तभी हम सुरक्षित रहेंगे। आप सुरक्षित रहेंगे। समाज सुरक्षित रहेगा।