कर्नाटक/हुबली। भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के रिसर्च में निजी एजेंसियों की भागीदारी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसके कारण सभी रिसर्च बड़े-बड़े कारपोरेट हाउस के पास चला जायेगा और आईसीएआर के नाम का गलत उपयोग होगा। किसान संघ ने मांग की है कि आईसीएआर को रिसर्च करने के लिए सरकार पर्याप्त राशि दें, जिससे वैज्ञानिक रिसर्च के कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कर अपेक्षाकृत परिणाम दें सके।
भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय प्रबंध समिति की बैठक उत्तर कर्नाटक के हुबली स्थित श्रीनिवास गार्डन में प्रारंभ हुई। इसमें भारतीय किसान संघ के डॉ सोमदेव शर्मा ने आईसीएआर द्वारा रिसर्च में प्राइवेट पब्लिक भागीदारी के प्रावधान को निरस्त करने संबधी प्रस्ताव रखा।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने बताया कि हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा रिसर्च में प्राइवेट एजेंसियों के साथ भागीदारी कर रिसर्च करने की घोषणा की गई है। आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक वर्षों से रिसर्च कार्य में लगे हुए हैं। इस प्रस्ताव के आने के बाद वह अपने आपको कमजोर व असहाय महसूस कर रहे हैं।
सदस्यता अभियान के बारे में जानकारी देते हुए भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने बताया कि यह आगामी वर्ष सदस्यता का वर्ष है। भारतीय किसान संघ ने एक लाख गांवों में सक्रिय ग्राम समिति बनाकर एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य तय किया है। प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक में विस्तृत योजना बनाकर सदस्यता अभियान सम्पूर्ण देश में प्रारंभ किया जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों से बाढ़ व सूखा से प्रभावित किसानों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है। सरकार से आग्रह है कि प्राकृतिक राहत आपदा कोष से किसानों को राहत राशि भुगतान कर उनकी मदद करे।