रामगढ़। श्री दिगंबर जैन मंदिर रामगढ़ एवं रांची रोड स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर जैन समाज का दशलक्षण महापर्व पूरे विधि विधान के साथ श्रद्धा पूर्वक 14 सितंबर को आरंभ हुआ। दशलक्षण महापर्व दशलक्षण विधान की मांडला स्थापित कर किया गया। श्री दशलक्षण महापर्व के पहले दिन प्रात: 6:30 बजे से विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान आरंभ हुआ। श्री दिगंबर जैन मंदिर में प्रात: कलश स्थापना, जलाभिषेक, शांतिधारा अखंड ज्योत एवं अष्टमंगल स्थापना की गई। पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजा की गयी। मंदिर में कलश स्थापना रमेश सेठी एवं नागरमल जैन द्वारा किया गया। वही हीरालाल पाटनी, संजय सेठी, संपतलाल चूड़ीवाल, मांगीलाल जैन, सुभाष जैन, नरेंद्र जैन ,देवेंद्र जैन, सुरेश सेठी आदि ने भी कलश स्थापना किया। प्रथम जलाभिषेक दिलीप चूड़ीवाला और नरेंद्र छाबड़ा ने किया। जबकि शांति धारा सुभाष पाटनी और ललित जैन ने किया। अखंड ज्योत की स्थापना रमेश सेठी द्वारा किया गया। पंच मेरु की स्थापना ललित गंगवाल, महावीर जैन, कमल जैन, भागचंद जैन द्वारा किया गया।
अष्टमंगल की स्थापना श्रीमती मीना जैन, डॉली जैन, शारदा जैन, उषा जैन, कंवर देवी बाजरा एवं प्रतिभा सेठी ने किया। वहीं श्री दशलक्षण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजा की गई इसमें उत्तम क्षमा, सबको क्षमा, सबसे क्षमा की बात कही गई। क्षमा पर्व सहनशीलता से रहने की प्रेरणा देता है। अपने मन से क्रोध ना होने देना। अगर हो भी जाए तो अपने विवेक से नम्रता से उसे विफल कर देना। क्षमा पर्व मनाते समय अपने मन में छोटे बड़े का भेद भावना रखते हुए सभी से क्षमा मांगना इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है। हम सब यह क्यों भूल जाते हैं कि इंसान हैं और इंसानों से गलतियां हो जाना स्वभाविक है। यह गलतियां या तो हमसे हमारी परिस्थितियां करवाती है या अज्ञातवास हो जाती है। ऐसी गलतियों पर ना हमें दूसरों को सजा देने का हक है और ना स्वयं को। यदि आपको संतुष्टि के लिए कुछ देना है तो क्षमा दीजिए।
यदि आपको संतुष्टि के लिए कुछ देना है, तो क्षमा दीजिए
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