नयी दिल्ली। बाबू जगजीवन राम अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। अस्पताल में महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) के बाद भी फर्श पर ही लिटा दिया जाता है। महिलाओं को आहार-दवा आदि सब फर्श पर ही दिया जा रहा है। अस्पताल की इस अव्यवस्था का शिकार रोजाना एक नहीं बल्कि दर्जनों महिलाओं को होना पड़ रहा है। यह सलूक उन महिलाओं के साथ किया जा रहा है जिनका नवजात बच्चा आईसीयू में भर्ती हैं।
10 दिन पहले हुई थी सिजेरियन डिलीवरी

महिलाएं सप्ताह-सप्ताह भर आईसीयू के बाहर ही फर्श पर चादर बिछाकर पड़ी रहती हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उत्तर -प्रदेश से आई अर्चना ने बताया कि मेरी 10 दिन पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने सलाह दी कि नवजात बच्चे को आईसीयू में भर्ती करना पड़ेगा। ऐसे में बच्चे को हर घंटे स्तनपान कराना होता है। इसलिए अस्पताल स्टाफ ने उस फ्लोर पर बिस्तर की व्यवस्था नहीं की, जिस पर आईसीयू है। ऐसे में मजबूरन फर्श पर ही आराम करना पड़ रहा है।

महिला का कहना है कि स्टाफ की मनमानी के चलते ही यहां महिलाओं को बिस्तर नहीं दिए जाते हैं। आमतौर पर फस्र्ट फ्लोर पर मौजूद वार्ड में बिस्तर खाली ही पड़े रहते हैं। अगर अस्पताल प्रशासन चाहे तो ऐसी महिलाओं के लिए उसी वार्ड में अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन इसकी जहमत उठाने के लिए कोई तैयार नहीं है। उधर जानकारों का कहना है कि डिलीवरी के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है, ऐसे में उन्हें जमीन पर सुलाना खतरनाक होता है।
‘बार-बार कैसे आएं, लिफ्ट भी खराब ’

फर्श पर आराम कर रही एक महिला ने बताया कि अस्पताल की लिफ्ट खराब पड़ी हुई है, डिलीवरी के दौरान नीचे ग्राउंड फ्लोर पर भर्ती किया गया था। स्तनपान के लिए हर एक घंटे में आना पड़ता है। डॉक्टरों की यह भी सलाह है कि सिजेरियन डिलीवरी के कुछ दिन बाद तक महिलाओं को सीढिय़ों से परहेज करना है। ऐसे में बार-बार आने से बचने के लिए आईसीयू के बाहर ही फर्श पर ही बिस्तर लगा लिया।

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