चाईबासा। झारखंड सरकार राज्य के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नई-नई सुविधाएं दे रही है। उसके बावजूद स्वास्थ्य सेवा का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकार करोड़ों रुपए खर्च करके भी लोगों को जागरूक करने में असमर्थ दिख रही है। झारखंड के सुदूरवर्ती गांव के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा के लिए उपल्बध 108 एंबुलेंस की जानकारी तक नहीं है। इस कारण जागरूकता के अभाव में जिला के मनोहरपुर स्थित तिरला गांव में देखने को मिला।तिरला गांव के दूरजो कुई ने अपने 32 वर्षीय बीमार बेटे अंजन कुई और 30 वर्षीय बहू जानू कुई को ठेले में लादकर अस्पताल पहुंचाया।
बेटे-बहू को ले जाते
बता दें कि दूरजो कुई के बेटे और बहू बीते शनिवार से बीमार हैं। उसके बावजूद भी परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय अपने घर में ही झाड़-फूंक और टोना-टोटका करवाते रहे। जब स्थिति नहीं सुधरी तब उसे ठेले में लादकर अस्पताल पहुंचाया। ऐसी स्थिति को देखकर विकास का दावा करनेवाली सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। जब लोगों को 108 एंबुलेंस का जानकारी तक नहीं है ऐसे में सरकार द्वारा विज्ञापन में लाखों करोड़ों रुपये खर्च करने पर भी सवाल खड़े करता है।