कोलकाता | हजारों करोड़ रुपये के सारदा चिटफंड घोटाला मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार को हिरासत में लेना जरूरी है। सीबीआई के अधिवक्ताओं ने मंगलवार को बारासात जिला जज कोर्ट में यह दलील दी है।

इस मामले में उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को हाईकोर्ट द्वारा हटा लिए जाने के बाद सीबीआई ने उन्हें तीन दिनों के अंदर चार बार नोटिस भेजा है लेकिन राजीव लापता हैं। अपनी अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने मंगलवार को बारासात की विशेष सीबीआई कोर्ट में याचिका लगाई थी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में सुनवाई करना उसके अधिकार क्षेत्र का बाहर है क्योंकि उक्त विशेष अदालत केवल ट्रायल कोर्ट है। उन्हें जिला जज कोर्ट में जाने की सलाह दी गई जिसके बाद राजीव के अधिवक्ताओं ने बारासात जिला जज कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत संबंधी याचिका लगाई।
इस दौरान सीबीआई की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि राजीव कुमार अरबों रुपये के चिटफंड घोटाला मामले में मुख्य कड़ी हैं। वह पूछताछ में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जानी जरूरी है। इधर राजीव के अधिवक्ताओं ने कहा कि 2013 में राज्य सरकार की ओर से चिटफंड मामले की जांच के लिए जो विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था उसमें महज एक आयुक्त रैंक के अधिकारी के तौर पर राजीव कुमार थे। वह मुख्य जांच अधिकारी नहीं थे बल्कि उनके ऊपर राज्य पुलिस के आईजी, एडीजी और डीजीपी थे। ऐसे में केवल राजीव पर दबाव बनाना और इस आधार पर उनकी गिरफ्तारी की अनुमति देना जायज नहीं होगा। कोर्ट को उन्हें अग्रिम जमानत देनी चाहिए।
खबर है कि न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

उल्लेखनीय है कि चिटफंड मामले में राजीव की गिरफ्तारी पर गत शुक्रवार को हाईकोर्ट ने रोक हटा ली थी। उसके बाद से सीबीआई उन्हें पूछताछ करने के लिए लगातार समन भेज रही है लेकिन कुमार सीबीआई के समन का कोई जवाब नहीं दे रहे हैं।

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