अजय शर्मा
रांची। झारखंड के 236 अफसरों की नौकरी जा सकती है। ये अफसर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) प्रथम और द्वितीय बैच के हैं। जेपीएससी में मेघा घोटाले की जांच सीबीआइ कर रही है। जांच में भारी पैरवी, पेशगी और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की पुष्टि हो गयी है। जेपीएससी के प्रथम बैच में 64 और द्वितीय में 172 अभ्यर्थियों को अधिकारी बनाने की अनुशंसा की गयी थी। इसके बाद इन सभी को बीडीओ, सीओ, डीएसपी, वित्त सेवा, राजस्व सेवा का अधिकारी बनाया गया। प्रथम बैच में किसी डीएसपी की नियुक्ति नहीं हुई थी। जेपीएससी द्वारा ली गयी 13 नियुक्ति परीक्षाओं की अलग-अलग जांच सीबीआइ कर रही है। प्रथम और द्वितीय बैच के अधिकारियों की नियुक्ति की जांच अब अंतिम चरण में है। कोर्ट को रिपोर्ट सौंपने के बाद कयास यह लगाया जा रहा है कि इन सबों की नौकरी जानी तय है।
गृह विभाग ने लिखा
सीबीआइ ने प्रथम और द्वितीय बैच के अधिकारियों के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी थी। इसका जवाब भी दे दिया गया है। इसमें लिखा गया है कि अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो में पीइ संख्या 40/10 दर्ज की गयी गयी है। निगरानी जांच में भी परीक्षा के दौरान घोर अनियमितता बरतने की पुष्टि हुई है। अंक पत्रों में छेड़छाड़ भी की गयी है। बाद में निगरानी ब्यूरो ने इस मामले में कांड संख्या 10/11 के तहत एफआइआर दर्ज किया था। बाद में न्यायालय ने जेपीएससी प्रथम और द्वितीय की जांच सीबीआइ से कराने के आदेश दिये। न्यायालय के आदेश पर 74 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन्हें बहाल किया गया, लेकिन सीबीआइ जांच जारी रखने का आदेश भी दिया था।
क्या मिला सीबीआइ को
सीबीआइ ने भी इस मामले में अपनी रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों को दी है, जिसमें लिखा है कि प्रथम एवं द्वितीय बैच की जांच अंतिम चरण में है, जिसमें भारी गड़बड़ी पायी गयी है। उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के संबंध में एफएसएल की रिपोर्ट ने भी पुष्टि की है। सीबीआइ ने इस संबंध में 18 से अधिक गवाहों के बयान भी लिये हैं। साथ ही, कुछ अधिकारियों से भी पूछताछ की थी। सीबीआइ डायरेक्टर इन दोनों मामलों की जांच के संबंध में समीक्षा करेंगे, फिर रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी जायेगी। सीबीआइ ने लिखा है कि जेपीएससी के तत्कालीन प्रभारी के अलावा बनाये गये अधिकारियों को भी यह पता था कि किस तरह उन्हें नौकरी दी जा रही है। मेघा घोटाले का यह सबसे सटीक उदाहरण है।
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