पटना। बुधवार को रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी की कोरोना से मौत हो गयी। उत्तरप्रदेश और देश के अन्य राज्यों में कोरोना ने कई राजनेताओं को निगल लिया है। इसके बाद भी बिहार में राजनीतिक दल कोरोना से बचाव को लेकर गंभीर नहीं हैं। नेता अपनी जान खतरे में डालने के साथ हजारों कार्यकर्ताओं की जान से भी खेल रहे हैं। विधानसभा के चुनावी दंगल में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कोरोना को लेकर जारी स्वास्थ्य संगठनों की गाइडलाइन टूट रही है। हर पार्टी कार्यालय में हर दिन टूटते नियम बड़े खतरे की घंटी हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में टूटा नियम
गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पार्टी के कई बड़े दिग्गज नेता जुटे थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी मौजूद थे। इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी थी तो जाहिर सी बात है कि प्रदेश के कोने-कोने से कार्यकर्ता जुटे होंगे। सैकड़ों लोगों की भीड़ में एक प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्री मौजूद हो और तब भी कोरोना को लेकर जारी नियम का पालन नहीं होना बड़ा मामला है।
नेता किसान बिल को लेकर विरोध की रणनीति बना रहे थे, लेकिन कोरोना से जंग को लेकर कोई सावधानी नहीं दिखी। कार्यालय में न तो सेनिटाइजेशन की व्यवस्था थी और न ही थर्मल स्क्रिनिंग ही किया जा रहा था। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता जहां खुद मास्क नहीं लगाये थे, वहीं कार्यकर्ता भी इसे लेकर बेफिक्र दिखे।
नजरअंदाज करने से हो सकता है कोरोना विस्फोट
स्वास्थ्य संगठनों के साथ सरकारें भी लगातार लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जागरुक कर रही हंै। भीड़ में एक दो भी कोरोना पॉजिटिव लोग हुए तो यह चेन काफी बड़ी हो सकती है। गुरुवार को कांग्रेस के कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा है। बुधवार को राजद कार्यालय में भी कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन टूटती दिखी। तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के साथ मिलकर कृषि बिल के खिलाफ लड़ाई की बात की। जब वह बाहर निकले तो भीड़ में घिर गये और इसी भीड़ में चुनाव प्रचार के लिए बने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यालय किसी भी राजनीतिक दल का हो नियम हर चौखट पर टूट रहा है।