जब IPL होता है तो भारतीय खिलाडियों का परफोर्मेंस शिखर पर पहुँच जाता है लेकिन जैसे ही हम किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने के लिए उतरते हैं भारतीय खिलाडियों के हाथ पैर फुल जाते हैं. एशिया कप में यही देखने को मिला . होन्ग कोंग से जीतने में पसीने छुट गए. पाकिस्तान और श्रीलंका के गेंदबाजों के सामने तो भारतीय बल्लेबाजों के हाथ पांव कांपने लगे . रिजल्ट सामने है जिस भारतीय टीम को चैम्पियन माना जा रहा था वह टूर्नामेंट से बहार हो गयी. भारत के टॉप क्रम के बल्लेबाजों की हालत यह है की वह कब अपना विकेट फेंक देंगे यह किसी को नहीं मालूम. अच्छी गेंद पर छक्का और ख़राब गेंद पर विकेट गवां देना इनकी आदत बन गयी है. सवाल उठ रहा है कि एक क्रिकेट टीम को पूरी दुनिया में नंबर वन बनने के लिए क्या चाहिए- अच्छे चयनकर्ता, उम्दा प्लेयर्स, शानदार सपोर्टिंग स्टाफ और एक ऐसा कप्तान जो सबको साथ लेकर चले। टीम इंडिया के पास ये सब है, लेकिन भारतीय टीम पिछले 11 साल के सबसे खराब दौर में नजर आ रही है।
साल 2011 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि हम किसी भी बडे़ टूर्नामेंट के चैंपियन नहीं रह गए हैं। चाहे ICC ट्रॉफी हो या फिर एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) का एशिया कप, कोई खिताब हमारे पास नहीं है।