रांची । कांके स्थित पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय का अस्तित्व खतरे में है। कॉलेज में नियमित शिक्षकों की कमी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़ा करते हुए भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने मान्यता देने से इंकार कर महाविद्यालय में नामांकन पर रोक लगा दी है।

124 नियमित शिक्षकों में मात्र 29 शिक्षक
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय में 124 नियमित शिक्षकों के पद हैं, जिनमें अभी मात्र 29 शिक्षक हैं। पिछले कई वर्षों से राज्य सरकार द्वारा नियमित बहाली नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय ने अनुबंध पर शिक्षकों की बहाली की थी। वर्तमान में महाविद्यालय में 20 अनुबंध शिक्षक कार्यरत हैं। मान्यता नहीं मिलने से इन शिक्षकों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। शिक्षकों की कमी के कारण कॉलेज का रिसर्च से लेकर हॉस्पिटल, फील्ड वर्क तक प्रभावित हो रहा है।

सरकार ने भरोसा दिलाया था
पूर्व में दो साल तक भारतीय पशु चिकित्सा परिषद (बीएचआइ) के द्वारा मान्यता रद्द करने के बाद राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर शिक्षकों की कमी पूरा करने का भरोसा दिलाया था। तब जाकर कॉलेज को मान्यता मिली थी। इसके बाद राज्य सरकार ने वेटनरी कॉलेज में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ायी है। ऐसे में एक बार फिर इसकी मान्यता खतरे में पड़ गयी है।

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