-शहीदों और पुरखों के सपनों को चकनाचूर कर रहे हेमंत सोरेन: राजू महतो
-बोरियो विधायक लोबिन हेब्रंम अपनी ही सरकार और पार्टी नेतृत्व पर जम कर बरसे
आजाद सिपाही संवाददाता
लोहरदगा। 17 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी महासभा लोहरदगा जिला समिति के तत्वावधान में बुधवार को समाहरणालय मैदान में कार्यकारी अध्यक्ष अमर किंडो की अध्यक्षता में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया, जिसमें मुख्य रूप से विधायक सह झारखंड बचाओ मोर्चा के संयोजक लोबिन हेंब्रम, पूर्व मंत्री सधनु भगत, केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो, प्रधान महासचिव कयूम खान, वरीय उपाध्यक्ष अश्विनी कुजूर, उपाध्यक्ष किशोर किस्कू, महासचिव प्रो. लाल अजय नाथ शाहदेव, केंद्रीय सचिव अरुण कुमार दुबे, आजम अहमद, इसरार अहमद, संयोजक प्रो विनोद भगत, भुनेश्वर सेनापति, राजकिशोर महतो आदि उपस्थित हुए। मौके पर बोरियो विधायक लोबिन हेंब्रम अपनी ही सरकार और पार्टी नेतृत्व पर जम कर बरसे। उन्होंने कहा कि जनता से जिस वादे और संकल्प के साथ हेमंत सोरेन सत्ता में आये थे, आज उन वादों और संकल्प को भूल गये हैं। अगर यहां के आदिवासी और मूलवासियों के पास जमीन ही नहीं बचेगी, तो आदिवासी मूलवासी कहां जायेंगे। आज आदिवासी मूलवासी समाज अपने ही राज्य में उपेक्षित होता जा रहा है। जल, जंगल और जमीन की लूट जारी है। सीएनटी, एसपीटी एक्ट में संशोधन कर सरकार इसे कमजोर करने में लगी है। आंदोलनकारी और झारखंड बचाओ मोर्चा इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। लोबिन ने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होते हुए भी अब तक न स्थानीय नीति बनी, न नियोजन नीति बनी। साथ ही विस्थापन आयोग का भी गठन नहीं हुआ। सरकार रोजगार देने की बात कह रही है, लेकिन सरकार यह तो बताये कि किस प्रखंड में किस कंपनी में अब तक कितने लोगों को 75 फीसदी नौकरी दी गयी है। लोबिन ने कहा कि हेमंत सोरेन ने चुनाव के वक्त स्मार्ट गांव बनाने की बात की थी, लेकिन अब वह स्मार्ट सिटी बनाने में लग गये हैं। ऐसे के राज्य की जनता का विश्वास खत्म हो रहा है।
झारखंड झारखंड आंदोलनकारी महासभा के अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड के राज नेता झारखंड की आदिवासी मूलवासी जनता की भावनाओं के साथ लगातार खिलवाड़ कर रहे हैं। झारखंड में हमारे शहीदों और पुरखों के सपनों को चकनाचूर करते हुए स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। पूर्व मंत्री सधनू भगत ने कहा कि यहां के महापुरुषों, आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया, तब सीएनटी और एसपीटी एक्ट बना। जो यहां के लोगों के जल जंगल जमीन का सुरक्षा कवच है। बावजूद इसके जमीन की लूट हो रही है।
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