स्प्रिंगफील्ड:  डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन को लेकर हिलेरी क्लिंटन के बेहद सख्त होने की आलोचना की है। ट्रंप की इस प्रतिक्रिया से रूसी राष्ट्रपति के साथ रिपब्लिकन उम्मीदवार के संबंध पर लोगों की भवें एक बार फिर तन गई हैं। ओहायो के स्प्रिंगफील्ड में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने हिलेरी द्वारा रूसी नेता की आलोचना किए जाने का मुद्दा उठाया। पश्चिमी देशों में पुतिन अपनी सैन्य आक्रामकता और लोकतंत्र-विरोधी प्रवृत्तियों के चलते बदनाम हैं।

ट्रंप ने रूस को परमाणु हथियारों से लैस बताते हुए हजारों लोगों की भीड़ को कहा, ‘‘वह पुतिन के बारे में बहुत गलत बोलती हैं और मुझे नहीं लगता कि यह अच्छा है।’’ उन्होंने सवाल उठाया, ‘‘आप किसी के बारे में इतना बुरा कैसे बोल सकती हैं?’’ पुतिन के बारे में कुछ भी बुरा बोलने में विफल रहने के लिए ट्रंप के पूरे प्रचार अभियान के दौरान उनकी आलोचना होती रही है और अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि उन्हें हालिया हैकिंग प्रयासों और रूस के बीच के संबंध का पता चला है। ऐसा लगता है कि यह हैकिंग नवंबर के चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए की गई थी।

ट्रंप लंबे समय से यह तर्क देते आए हैं कि यदि अमेरिका का रूस के साथ एक ज्यादा सकारात्मक संबंध होता है तो यह अमेरिका के लिए अच्छा होगा। वह सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद की सरकार को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद उन्हें इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खिलाफ मिलकर काम करने के लिए कह चुके हैं। रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार माइक पेन्स ने पुतिन को एक ‘‘छोटा और दादागिरी करने वाला नेता’’ बताकर उपराष्ट्रपति पद की बहस के दौरान एक सख्त रूख अख्तियार किया था। ट्रंप ने कहा है कि पुतिन राष्ट्रपति बराक ओबामा से ज्यादा मजबूत नेता हैं। ट्रंप पुतिन के ‘‘अपने देश पर मजबूत नियंत्रण’’ के लिए उनकी तारीफ कर चुके हैं।

अमेरिका ने रूस पर हिलेरी के प्रचार से जुड़े ईमेल को हैक करने का आरोप लगाया था। लेकिन पुतिन ने कल इन दावों को नकारते हुए यह कहा था कि ये आरोप जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा ट्रंप को मदद दिए जाने की बात ‘‘पूरी तरह बकवास’’ है। उन्होंने सोची में कहा, ‘‘यह राजनीतिक संघर्ष का एक हथियार मात्र है, जनमत को भटकाने का तरीका।’’ फिर भी, रूसी नेता ने कहा कि ट्रंप ‘खर्चीले’ लग सकते हैं लेकिन वह उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभिजात्य वर्ग से तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह समय बताएगा कि उनका यह कदम कितना प्रभावी होगा।’’

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